कमरछट (हलषष्ठी) व्रत :- महिलाओं ने संतान प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखी -


रिपोर्ट -: तेजराम निर्मलकर छुरा-मड़ेली// छत्तीसगढ़ की प्रमुख त्योहार कमरछट,  सभी वर्ग की महिलाओं ने संतान प्राप्ति एवं संतान की लंबी उम्र के लिए  कमरछठ का व्रत रखा। सुबह माताएं पुजा सामान लेकर नहाने तालाब गई और नहाने के बाद शिव पार्वती मंदिर में जलाभिषेक किया और दुध, दही,घी, बेलपत्ती, गुलाल, चंदन बंदन, अगरबत्ती,श्रीफल आदि अर्पित कर संतान प्राप्ति एवं संतान की दीर्घायु की कामना की। 

दोपहर मे कमरछट की पूजा के लिए महिलाओं ने गल्ली-मोहल्ले में मिलकर प्रतीकस्वरूप दो सगरी के साथ मिट्टी की नाव(डोगा) बनाई और काशी फूल और अन्य फूलों एवं पत्तो से सगरी को सजाकर वहां गौरी गणेश बनाकर शिव-पार्वती, कमरछठ मईया की पूजा-अर्चना की सगरी भरी और सारी रस्में निभाई ।

बिना हल चले चीजों का इस कमरछठ पर्व में भारी महत्त्व-

प्रसिद्ध  छत्तीसगढ़ में कमरछट में भाजियो का अपना एक अलग महत्व है। इस व्रत में बिना हल चली चीजों का भाजियां (जैसे -: मुनगा भांजी,चरोटा भाजी, कुम्हड़ा भाजी,,चौलाई भाजी,चेचभाजी, खट्टाभाजी) का उपयोग किया जाता है। कमरछठ व्रत में छह तरह की भाजियां, पसहर चावल, काशी के फूल, महुआ के पत्ते, धान की लाई सहित पूजा की जाती है

छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्योहारों में से एक कमरछठ को हलछठ या हलषष्ठी भी कहा जाता है। छठ की तर्ज पर इस व्रत को करने वाली माताएं इस मौके पर कमरछठ की कहानी सुनकर शाम को डूबते सूर्य को अध्र्य देने के बाद अपना व्रत खोलती है।

मड़ेली (छुरा) निवासी लक्ष्मी ठाकुर, पुष्पा ध्रुव, महेश्वरी ठाकुर, बिंदिया ठाकुर, सीमा निषाद, ममता, निषाद, कुन्ती बाई निर्मलकर, चमेली बाई निर्मलकर, फूलबाई साहू, लता साहू, उर्वशी, सविता सिन्हा, मीरा ठाकुर, रामप्यारी निर्मलकर, संतोषी सिन्हा, सीता बाई ध्रुव, पीला बाई साहू,रुखमनीध्रुव, रूखमणी ठाकुर, संतोषी साहू ने बताया कि यह व्रत संतान प्राप्ति और संतान की दीर्घायु के लिए कमरछठ व्रत किया जाता है। छत्तीसगढ़ में कमरछठ उपवास का महत्व है जो संतान प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र के लिए किया जाता है।
ad inner footer ad inner footer ad inner footer ad inner footer ad inner footer ad inner footer ad inner footer ad inner footer

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Welcome to Chhattisgarh SevaLearn More
Accept !