राजिम से नेहरू साहू कि रिपोर्ट
किसान विरोधी कानून केंद्र सरकार वापस ले - छत्तीसगढ़ किसान मज़दूर महासंघ
देश के 350 संगठनों के समन्वय से बनी अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आव्हान पर 26-27 नवम्बर को नये किसान विरोधी कानून के खिलाफ दिल्ली कूच के आव्हान के समर्थन में रायपुर में छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ द्वारा किसान संसद का आयोजन किया गया ।
संसद में काले कानून की वापसी की मांग को लेकर हो रहे किसान आंदोलन को कुचलने के लिये मोदी सरकार के दमन के खिलाफ सभी किसान नेताओ ने कड़ी निंदा की और इस दमन के खिलाफ पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया गया ।
किसान संसद का आयोजन देश की संसदीय परंपरा के अनुरूप करते हुए छत्तीसगढ़ के सांसदों को आंमत्रित किया गया, लेकिन कोई भी सांसद नहीं आये । सांसदों की अनुपस्थिति में उनकी सीटे खाली छोड़कर किसान प्रतिनिधियों ने संसद की कार्रवाई में हिस्सा लिया । किसान संसद की अध्यक्षता पूर्व विधायक एवं जिला किसान संघ बालोद के संरक्षक जनकलाल ठाकुर ने की । किसान संसद में पारित प्रस्तावों को ज्ञापन के रूप में राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के नाम से शासन के प्रतिनिधि तहसीलदार को सौंपा गया ।
किसान प्रतिनिधियों की ओर से डॉ संकेत ठाकुर ने संसद में चर्चा की शुरुआत करते हुए तीन प्रस्ताव पेश किया पहला कि केंद्र सरकार द्वारा लाये गये तीनों कानून वापस लिये जाएं, दूसरा दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में किसानों पर दमन की कड़ी निंदा की जाये और तीसरा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदी की गारंटी का कानून बनाया जाये ।
संसद में किसान महासंघ से जुड़े दो दर्जन से अधिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इन प्रस्तावों पर चर्चा की ।
किसान संसद की कार्रवाई का संचालन अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के राज्य सचिव तेजराम विद्रोही और महासमुंद जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर ने किया ।
किसान संसद की चर्चा में लगभग दो दर्जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने काले कानून पर अपने विचार रखे ।
चर्चा में भाग लेते हुए नदी घाटी मोर्चा के गौतम बंद्योपाध्याय ने किसान विरोधी कानून को देश की खेती-किसानी, किसानों और उपभोक्ताओं को महंगाई से बर्बाद कर देने वाला बताया और इसके खिलाफ डटकर संघर्ष करने का संकल्प व्यक्त किया ।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के उपाध्यक्ष मदन लाल साहू ने किसान संसद के तीनों प्रस्ताव के समर्थन में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों को एकजुट करने का वक्त आ गया है अभी नहीं तो कभी नही की तर्ज पर गांव गांव में किसानों को संगठित होना अब बहुत जरूरी हो गया है ।
पूर्व विधायक एवं तत्पर के अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे ने कहा कि किसानों द्वारा देशभर में आंदोलन चलाये जा रहे हैं लेकिन किसानों पर पानी की बौछार की जा रही है, बड़ी संख्या में उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है यह सरकार असहमति पर भी चर्चा करने को तैयार नहीं है । इतना अत्याचार तो किसी दुश्मन देश की सरकार भी नहीं करती । उन्होंने किसानों से लंबी लड़ाई का आव्हान किया ।
राष्ट्रीय किसान समन्वय समिति सदस्य पारसनाथ साहू ने कहा कि किसानों के आंदोलन को कुचलने के लिये जिस तरह से केंद्र सरकार दमन कर रही है लेकिन इसके बावजूद हजारों की संख्या में दिल्ली पहुंच गए, यह केंद्र सरकार की हार है । यही हार उन्हें अगले आम चुनाव में दिखाना होगा । छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह के बड़े किसान आंदोलन की तैयारी करने की उन्होंने किसानों से अपील की ।
गिरधर मढ़रिया, अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग समाज ने किसानों को अपने अधिकारों की लड़ाई के लिये संघर्ष तेज करने कहा और कहा किसानों को बैल की तरह जुते रहने की बजाय शेर की तरह दहाड़ना होगा ।
छत्तीसगढ़ी समाज के अध्यक्ष मनहरण टिकरिहा ने समाज के सभी वर्गों से किसानों के आंदोलन में शामिल होने का आव्हान किया ।
भारतीय किसान पार्टी के तामेश्वर साहू ने जमाखोरी को खुली छूट दिये जाने का विरोध करते हुए कहा कि टमाटर-प्याज की वाजिब कीमत किसानों को तो नहीं मिलती लेकिन जमाखोरी की वजह से उपभोक्ताओं को महंगी कीमत पर व्यापारी उपलब्ध करा रहे हैं ।
किसान संसद में 4 प्रस्ताव पारित किये गये । पहले प्रस्ताव को क्रांतिकारी किसान महिला संगठन की श्रीमती संतोषी ने प्रस्तुत किया जिसमें कहा गया कि तीनों क़ानूनो को रद्द किया जाये क्योंकि यह तीनों कानून कारपोरेट हितैषी तथा कृषि, किसान और उपभोक्ता विरोधी है ।
दूसरा प्रस्ताव शिवनाथ नदी किनारे श्रीमती विजय लक्ष्मी ठाकुर ने प्रस्तुत किया जिसमें स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की मांग की ।
छत्तीसगढ़ राज्य अभिकर्ता एवं निवेशक कल्याण संघ के लक्ष्मी नारायण चन्द्राकर ने तीसरा प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि कृषि उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदी का गारंटी कानून बनाकर किसानों को सालभर फसल उपज बेचने की सुविधा दी जाये ।
तेजराम विद्रोही ने चौथा प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि खरीफ फसलों की सरकारी खरीदी प्रतिवर्ष 1 नवम्बर नियत की जाए एवं राजीव गांधी न्याय योजना के तहत देय राशि का एक मुश्त भुगतान किया जाये ।
चारो प्रस्ताव के आधार पर तेजराम विद्रोही द्वारा राष्ट्रपति व मुख्यमंत्री के नाम से प्रस्तुत ज्ञापन को ध्वनिमत से मंजूर करने के बाद तहसीलदार को सौंपा गया ।
आज की संसद में छत्तीसगढ़ के दो दर्जन से अधिक किसान मजदूर व सामाजिक संगठनो के प्रतिनिधियों ने काले कानून और किसान आंदोलन के दमन के खिलाफ अपना आक्रोष व्यक्त किया । जिनमे प्रमुख थे नई राजधानी किसान कल्याण संघर्ष समिति के रूपन चन्द्राकर, आदिवासी भारत महासभा के सौरा यादव, एक मानव समाज के सुबोध देव, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा दल्ली राजहरा के नवाब जिलानी, जिला किसान संघ बालोद के गैंदसिंह ठाकुर, किसान मजदूर संघर्ष समिति बसना के लोकनाथ नायक, किसान भुगतान संघर्ष समिति बागबाहरा के गोविंद चन्द्राकर, किसान जन जागरण समूह सराईपाली के सुशील भोई, शिवनाथ किनारे किसान समिति दुर्ग के शिव कुमार निषाद आदि ।
सभा के अंत में छत्तीसगढ़ सिख समाज के अनेक प्रतिनिधि भी संसद की कार्रवाई में शामिल हुए और उन्होंने किसानों में नया जोश भर दिया । केंद्र सरकार के खिलाफ भारी नारेबाजी के बीच सिख समाज के कृपाल सिंह और साथियों ने छत्तीसगढ़ में किसान आंदोलन को और मजबूत करने के लिये अपने समाज की ओर से भरपूर सहयोग का आश्वासन दिया ।


