पढ़ना लिखना अभियान: एक हजार शिक्षक 10 हजार निरक्षरों को दे रहे शिक्षा
अगस्त 05, 2021
महासमुंद।
पढ़ना-लिखना अभियान
के अंतर्गत पूरे
छत्तीसगढ में 15 आयु वर्ग
से अधिक
उम्र के करीबन
ढाई लाख और
निरक्षरों को साक्षर
किए जाने का
लक्ष्य है। इस
योजना में पढ़ना-लिखना और गणितीय
कौशल में वृद्धि
कर साक्षरता कौशल
अर्जित करने के
लिए 120 घंटे की
पढ़ाई करायी जा
रही है। पढ़ाने
वाले स्वयंसेवी शिक्षक
स्कूल कॉलेज के
बच्चे एनसीसी, एनएसएस,
स्काउट गाइड, नेहरू युवा
केन्द्र के स्वयं
सेवक, सेवानिवृत्त व्यक्ति
शिक्षक, शिक्षिकाओं एवं स्वयंसेवी
संस्थाओं के व्यक्तियों
का पढ़ाई के
इस कार्य में
सहयोग लिया जा
रहा है। साक्षरता
केंद्र किसी भी
स्कूल, कॉलेज के भवन
पंचायत एवं सार्वजनिक
भवन में लगाए
जा सकते हैं।
यह केंद्र किसी
के घर में
भी लग सकता
है, इसके लिए
कोई बंधन नहीं
है। इसके लिए
कोई समय भी
निश्चित नहीं है। कार्यक्रम
के समन्वय के
लिए स्कूल शिक्षा
विभाग की ओर
से राज्य साक्षरता
मिशन प्राधिकरण द्वारा
पूरे प्रदेश में
असाक्षरों व स्वयंसेवी
शिक्षकों को चिन्हित
अर्थात सर्वे का कार्य
भी किया गया
है। स्वयंसेवी शिक्षकों
को पढ़ाने के
लिए विशेष तकनीकी
अपनाई जाती है,
उन्हें विशेष प्रशिक्षण की
आवश्यकता होती है।
इसके लिए प्रत्येक
जिले में दो-दो रिसोर्स
पर्सन वह प्रत्येक
ब्लॉक में आनुपातिक
रूप से कुशल
प्रशिक्षकों का चयन
हुआ। उनका ऑनलाइन
प्रशिक्षण भी किया
जा चुका है।
कार्यक्रम
के समन्वय के
लिए स्कूल शिक्षा
विभाग की ओर
से राज्य साक्षरता
मिशन प्राधिकरण द्वारा
पूरे प्रदेश में
असाक्षरों व स्वयंसेवी
शिक्षकों को चिन्हित
अर्थात सर्वे का कार्य
भी किया गया
है। स्वयंसेवी शिक्षकों
को पढ़ाने के
लिए विशेष तकनीकी
अपनाई जाती है,
उन्हें विशेष प्रशिक्षण की
आवश्यकता होती है।
इसके लिए प्रत्येक
जिले में दो-दो रिसोर्स
पर्सन वह प्रत्येक
ब्लॉक में आनुपातिक
रूप से कुशल
प्रशिक्षकों का चयन
हुआ। उनका ऑनलाइन
प्रशिक्षण भी किया
जा चुका है।
Tags

