विशेष लेख ग्रामीण रोजगार योजना से मनोहरपुर में बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव मजबूत



 कच्चे और असुरक्षित भवन से पक्के आंगनबाड़ी केंद्र तक का सफर

19 परिवारों को सीधा लाभ और 453 मानव-दिवस का रोजगार


ग्रामीण रोजगार योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऐसी सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण का माध्यम बन रही है, जो गांव के सामाजिक विकास को लंबे समय तक नई दिशा देती हैं। लोरमी विकासखंड के ग्राम पंचायत मनोहरपुर में ग्रामीण रोजगार योजना एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिसरण से निर्मित आंगनबाड़ी भवन इसका जीवंत उदाहरण है। कभी छोटे और असुरक्षित कच्चे मकान में संचालित होने वाला आंगनबाड़ी केंद्र अब पक्के, सुरक्षित और सुविधायुक्त भवन में संचालित हो रहा है।


मनोहरपुर में आंगनबाड़ी केंद्र के लिए उपयुक्त भवन नहीं होने से बच्चों और माताओं को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। गर्मी और बारिश के मौसम में बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण था। वहीं पोषण सामग्री, दवाइयों, खिलौनों एवं शिक्षण सामग्री के सुरक्षित भंडारण के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। इन समस्याओं के समाधान के लिए ग्राम सभा में आंगनबाड़ी भवन निर्माण का प्रस्ताव रखा गया और इसे ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्ययोजना में शामिल किया गया।


11.69 लाख की लागत से बना सुविधायुक्त भवन
ग्राम सभा से अनुमोदन के बाद तकनीकी प्राक्कलन तैयार कर कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई। 13 नवंबर 2024 को 11.69 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी हुई, जिसमें ग्रामीण रोजगार योजना से 08 लाख रुपये तथा महिला एवं बाल विकास विभाग से 3.69 लाख रुपये का अभिसरण शामिल था। कार्य की शुरुआत 05 अगस्त 2025 को हुई और 09 मार्च 2026 को आंगनबाड़ी भवन निर्माण पूर्ण हुआ। भवन में बच्चों के अनुकूल शौचालय, सुरक्षित पेयजल, रसोईघर, खेल के लिए स्थान तथा पोषाहार, दवाइयों, खिलौनों और पुस्तकों के सुरक्षित भंडारण के लिए स्टोर रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को 453 मानव-दिवस का रोजगार भी प्राप्त हुआ। इस प्रकार यह परिसंपत्ति गांव के लिए रोजगार और विकास दोनों का माध्यम बनी।

बच्चों की उपस्थिति बढ़ी, माताओं को मिली राहत
नए भवन के निर्माण के बाद आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बच्चों की दैनिक औसत उपस्थिति 30-40 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत से अधिक हुई है। स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण गतिविधियों के लिए भी बेहतर वातावरण मिला है। नियमित टीकाकरण एवं स्वास्थ्य जांच में भी सुधार दर्ज किया गया है। सुरक्षित आंगनबाड़ी केंद्र का सकारात्मक प्रभाव महिलाओं के जीवन पर भी पड़ा है। माताएं अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण में छोड़कर कृषि कार्य, मजदूरी और स्व-सहायता समूह की गतिविधियों में अधिक सहजता से भाग ले पा रही हैं। इससे परिवारों की आजीविका गतिविधियों को भी संबल मिला है।

गांव का विकास केंद्र बना आंगनबाड़ी भवन
आज यह भवन केवल बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और पोषण का केंद्र नहीं, बल्कि गांव में स्वास्थ्य जागरूकता बैठकों और सामाजिक गतिविधियों के आयोजन का महत्वपूर्ण स्थल भी बन गया है। 19 परिवार प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुए हैं, जिनमें 03 अनुसूचित जनजाति परिवार शामिल हैं। सरपंच श्रीमती दुर्गा उत्तम साहू ने बताया कि “ ग्रामीण रोजगार योजना और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयास से हमारे गांव को स्थायी और सुंदर आंगनबाड़ी भवन की सौगात मिली है। अब बच्चों को सुरक्षित वातावरण में प्रारंभिक शिक्षा मिल रही है।”

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