जिले के सभी 68 धान उपार्जन केन्द्रों में पक्का चबूतरा निर्माण अन्तिम दौर में


बेमौसम बारिश से खरीदा गया धान नहीं होगा खराब 
कलेक्टर ने दिए जल्द पूरा करने के निर्देश दिए है 

महासमुंद 19  जुलाई 2020 - समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदे गये धान को सुरक्षित और बेहतर रख-रखाव के लिए प्रदेश में उर्पाजन केन्द्रों में पक्के चबूतरो का निर्माण किया जा रहा है। अब बेमौसम बारिश होने से खरीदा गया धान खराब नहीं होगा। पहले बिना चबूतरे के जमीन पर रखें धान को बारिश में भीगने और खराब होने का डर सदैव बना रहता था। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस बात को समझा और प्रदेश के सभी उर्पाजन केन्द्रों में पक्का चबूतरा निर्माण कराने की पहल की। जमीन की अपेक्षा चबूतरा पर रखे धान ज्यादा सुरक्षित रहेगा। वहीं उन्हें अच्छे कैप कवर से भी ढका जा सकेगा।

महासमुंद जिले के सभी 68 उर्पाजन केन्द्रों में 461 पक्का चबूतरा निर्माण का काम अन्तिम दौर में है। कलेक्टर श्री कार्तिकेया गोयल ने काम जल्द से जल्द  31 जुलाई तक पूरा करने के निर्देश दिए है । किसानों कि खून, पसीने की कमाई से उपजा धान को भीगने से बचाने के लिए प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति के धान खरीदी केंद्रो के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना के तहत 461 चबूतरों के लिए 25-25 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। उर्पाजन केन्द्रों में चबूतरा बन जाने से आगामी धान खरीदी सीजन में किसानों का धान बेमौसम बारिश के कारण खराब नहीं होगा। कोविड-19 और लॉक ड़ाउन के चलते चबूतरा निर्माण की गति धीमी थी ।किंतु फिर भी लाँक दाउन में मिली छूट के बाद जिले में एक सेकड़ा पक्का चबूतरे का निर्माण काम पूरा होने को है । 

राज्य सरकार  द्वारा गरीब, ज़रूरतमंद और किसानों के लिए कई हितकारी योजनाए संचालित की जा रही है मुख्य कार्यपालन अधिकारी डा. रवि मित्तल ने बताया कि  महासमुन्द जिले में  1.50 लाख से ज़्यादा श्रमिकों को रोजगार दिया गया। उन्होंने कहा कि काफ़ी चबूतरा पूर्णता की ओर है                                                 
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