14वे व्याकरण शाला का काव्य संसद, छत्तीसगढ़ में हुआ आयोजन

रायगढ़- साहित्यिक और सामाजिक संस्था के रूप में राज्य में स्थापित काव्य संसद, छत्तीसगढ़ के द्वारा पिछले रविवार को वर्चुअल पटल में 14 व्याकरण शाला का आयोजन किया गया। यह व्याकरण शाला व्यंग्य लेखन पर आधारित रहा। जिसके बारे में काव्य संसद के प्रमुख पुखराज प्राज ने जानकारी देते हुए कहा कि व्याकरण शाला में हम साहित्य सृजन एवं प्रत्येक रविवार को एक विधा का चयन कर उस विधा के परिचय, इतिहास, वर्तमान के सृजनकार,और विविध विषयों पर चर्चा-परिचर्चा करके है। इससे उस विधा से संबंधित ज्ञान और सृजन करने हेतु ज्ञानार्जन करते है। काव्य संसद के उपाध्यक्ष डिग्री लाल जगत ने जानकारी देते हुए कहा कि व्याकरण शाला में राज्य के कई जिलों के साहित्यकार साथ जुड़ रहे हैं। साथ ही कई विधाओं में वे साथी अपने विचार भी साझा करते हैं।   

ई-व्याकरण शाला का आयोजन दो पड़ाव में हुआ। पहले पड़ाव में व्याख्यान माला का आयोजन हुआ जिसमें व्यंग्य का परिचय रायपुर से साहित्यकार देवयानी शुक्ल ने समूह के सदस्यों के मध्य रखा। व्यंग्य की परिभाषा के संदर्भ में वक्तव्य जांजगीर-चांपा से साहित्यकार गिरधारी लाल चौहान ने दिया। कोरिया जिले से साहित्यकार तारा पांडे ने समूह के बीच सटायर और व्यंग्य के संबंध का विवरण रखा। रायगढ़ से युवा कवयित्री पुष्पा पटनायक ने व्यंग्य के तत्वो के बारे में जानकारी दी। कांकेर से वरिष्ठ साहित्यकार नलिनी बाजपेयी ने व्यंग्य के गुणों के बारे में जानकारी दी। अंतिम व्याख्यान में पुखराज प्राज ने व्यंग्य सृजन कैसे करे? इस संदर्भ में उदाहरण सहित व्याख्यान समूह में दिया।  

वहीं ई-व्याकरण शाला के दूसरे पड़ाव में प्रश्नकाल का आयोजन हुआ जिसमें व्यंग्य लेखन के संबंध में विविध प्रश्नोतर हुए। जिसमें काव्य संसद प्रमुख पुखराज प्राज के द्वारा समस्त प्रश्नों के उत्तर दिये गए। 

बॉक्स 01:- 

18 जिलों से उपस्थित रहे साहित्यकार

काव्य संसद के ई- व्याकरण शाला के आयोजन में राज्य भर के विभिन्न जिलों से साहित्यकारों की उपस्थिति रही। इस गोष्ठी में कांकेर से मीरा आर्ची चौहान, नलिनी बाजपेयी, कोरिया से बिजेन्द्र अहीर, तारा पांडेय, राजनांदगांव से पद्मा साहू, माधवी गणवीर,रायगढ़ से गुलशन खम्हारी, डिग्री लाल जगत निर्भीक, पुष्पा पटनायक, अजय पटनायक, जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान, बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार, चेतन सिंह, लीलाधर कुम्हार, रायपुर से देवयानी शुक्ल, मुंगेली से नागेश कश्यप, महासमुंद से सुन्दर लाल डडसेना, विनोद कुमार जोगी, ओडिशा से मोनालिसा बेहरा, सूरजपुर से मनोज कुमार पाटनवार, दुर्ग से अनुरमा शुक्ल, बिलासपुर से सावित्री यादव, कोरबा से गोमती सिंह, बलरामपुर से क्षितिज तिवारी, कोण्डागांव से स्वपन बोस सहित गरियाबंद, बेमेतरा से साहित्यकार इस व्याकरण शाला के दौरान वर्चुअल पटल पर उपस्थित रहे।
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