छत्तीसगढ़ सेवा न्यूज कोरबा से द्वारिका यादव की रिपोर्ट
नव दीप जले नव फूल खिले, नित नई बहार मिले, दीपावली के पावन अवसर पर आपको मां लक्ष्मी, मां सरस्वती व गणपति देव का आशीर्वाद मिले । डॉ संजय गुप्ता आईपीएस
कोरबा - आईपीएस के प्राचार्य डॉक्टर संजय गुप्ता ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आईपीएस से जुड़े समस्त परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेसित की साथ ही बाल दिवस की भी ढेरों बधाइयां समस्त बच्चों को प्रेसित किये ज्ञात हो कि पिछले सात आठ महीनों से लॉक डाउन की वजह से स्कूलें ऑनलाइन ही संचालित हो रही है । प्रतिवर्ष आई.पी.एस. दीपका द्वारा बाल दिवस बड़े ही धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता रहा है । कोविद 19 पेंडेमिक के मद्देनजर सभी बच्चों से आमने सामने भले ही मुलाकात नहीं हो पा रही पर हमारा प्रयास पूरे लॉक डॉउन के दौरान यही रहा कि किसी तरह से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखवाएं साथ ही उन्हें सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों में व्यस्त रखें जिससे कि उनका ध्यान बंटा रहे व कुछ हद तक हम कामयाब भी रहे । इस वर्ष बाल दिवस व दीपावली एक साथ एक ही दिन पड़ी है । जिसे लेकर बच्चों में अलग ही उमंग उत्साह होगा । सभी घरों में साफ, सफाई, दीवारों की पेंटिंग, नए कपड़ों की खरीददारी, पूजा पाठ, फटाके, रंगोली, घर पर नए वस्तुवों की खरीददारी हो रही होगी । ऐसे में सबकी व्यस्तता का अंदाजा है हमें हम आईपीएस की तरह से आप तमाम कोरबा वासियों को व आईपीएस से जुड़े सारे परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं प्रेसित करते हैं । साथ ही सभी बच्चों को बाल दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेसित करते हैं । आप सभी का जीवन मंगलमय हो । जीवन मे खुशियों की बरसात हो, त्योहार बड़े ही उमंग उत्साह से बीते आगे दीवाली का आध्यात्मिक रहस्य समझाते हुवे प्राचार्य डॉक्टर संजय गुप्ता ने समझाया कि अंग्रेजी में दीवाली में अली का नाम है व रमजान में राम है । उत्सव शब्द उत्साह से जुड़ा हुआ है । हम प्रतिवर्ष दीपावली मनाते हैं । अगर हम उनके पीछे छुपे अध्यात्मिके रहस्य को समझकर दीपावली या अन्य कोई भी त्योहार सेलिब्रेट करें तो सेलिब्रेशन के साथ एक और चीज मिलती है वह है संस्कार जिस तरह से हम दीपावली में घर की साफ सफाई करते हैं । उसी तरह हमें अपने मन, बुध्धि की भी साफ सफाई करनी चाहिए । अगर हमारे मन में किसी के प्रति ईष्या द्वेष की भावना है तो हमें उससे उबरना चाहिए अपनी कमी कमजोरियों को दूर करना चाहिए तो साफ सफाई मन की मन सच्चा तो उसे सब पसंद करते हैं जीवन मे सच्चाई व सफाई अत्यंत ही आवस्यक है । रिस्तों को मधुर व विश्वसनीय बनाने के लिये मन की सफाई व सच्चाई जरूरी है । दीपावली में हम नए बर्तन खरीदते हैं तो हमें अपने जीवन मे भी दिव्य बुध्धि पानी है । अक्सर हम देवी सरस्वती व गणेश देव के सामने दिव्य बुध्धि मंगनते हैं । हमारी बुद्धि एक पात्र के समान है अर्थात बर्तन के समान है जिस तरह हम घर के बर्तन में अनेक चीजे रखते हैं उसी तरह हम हमारी बुद्धि में ज्ञान की धारणा करते हैं। व जीवज में ज्ञान ही तो सबकुछ है अगर ज्ञान है तो हम अच्छे से पास करके अच्छे काम करके खूब पैसे कामके अपने घर परिवार के सदस्यों की तथा समाज की अथाह सेवा कर सकते हैं । हम दीपावली में घर की पुरानी चीजों को कबाड़ में निकालकर बाहर करते हैं व नई नई वस्तुवों का नए कपड़ों को घर और लाते हैं वस्तुवों का इस्तेमाल करते हैं व कपड़ों को पहनकर उत्सव मनाते हैं । तो लौकिक जीवन मे भी हमें पुराने संस्कार पुरानी आदत जो हमारे जीवन को गलत राह ओर लेकर जा रही होती है उन आदतों को इस दीपावली में अपने से दूर करना है । आत्म ज्ञान का दीपक जलाना है । ज्ञान व प्रभु प्रेम का घी डालना है । हम दीपावली में मोमबत्ती या दीपक जलाते हैं । उसका रहस्य यह कि दीपक मिठ्ठी का बना होता है जो शरीर का प्रतीक है व दीपक पर जलने वाली लौ आत्मा का प्रतीक है जब ज्ञान, योग से हम हमारी चेतना को जगाते हैं । अपने आत्मिक स्वरूप का बोध होने पर अपने को व परमात्मा को पहचानते हैं जिसकी स्मृति में दीपक या कैंडल जलाया जाता है । दीपावली में हम लक्ष्मी की गणेश की सरस्वती जी का आव्हान करते हैं जिसके पीछे का भाव यह कि जब हम पुराने संस्कार छोड़ नए दिव्य संस्कार पीजिटिव हैबिट धारण करते हैं तब हमारे सोचने का तरीका भी सकारात्मक हो जाता है और सकारात्मक आदत व विचार के साथ हम जो कुछ भी करते हैं उसमें सफलता पाते हैं । जिससे लक्ष्मी का आव्हान जीवन मे होता है, लक्ष्मी का आव्हान माना ज्ञान, गुण, शक्ति, अनुभव, अध्यात्मिक संकल्पों रूपी धन से धनधान्य हो जाते हैं । सकारात्मक सोच से हम जिस दिव्य बुध्धि की प्राप्ति करते हैं वह हुवा सरस्वती जी का आव्हान, आज लोग घर के बाहर तो लाइट जला लेते हैं और ज्ञान से अपने जीवन को नहीं जगा पाते अर्थात कई ऐसी भी लोग हैं जो ज्ञान पाने से वंचित रह जाते हैं । तो सबसे बड़ा धन है ज्ञान धन जिसे अपने बुध्धि रूपी बर्तन में धारण करना है । इस दीपावली अपने सभी करिबियो को रिगार्ड देना ही है साथ साथ जिनसे हमारे रिस्ते मधुर नहीं उन्हें उनकी गलती के लिये माफ कर देना है । और जिस किसी का दिल हमने दुखाया हो उनसे माफी मांगकर रिस्ते मधुर बना लेने हैं तभी आप सहीं मायने में सच्ची सच्ची दीपावली मनाएंगे, खुशियों अपने आप को ही खुशी प्राप्त होने की अपेक्षा रखे रहने से नहीं मिलती बल्कि खुशियां तो दूसरों को खुश करके मिलती है । जब छोटी मोटी चीजों को खरीदकर कुछ क्षण के लिये हम खुशी का अनुभव करते हैं पर समय के साथ वह खुशी भी गायब हो जाती है । पर जब हम किसी की मदद करते हैं तब उससे मिलने वाली खुशी और कमाई अविनाशी होती है । जो कि रियल खुशी व रियल कमाई होती है। जिस तरह दीपावली में दिया होता है जिस एक दिया से अनेक दिया प्रज्वलित कर एक कतार में अनेक दिए रखे जाते हैं । ठीक उसी तरह हमें शिक्षित बनकर खुद के ज्ञान की दीपक जलानी है साथ ही साथ ज्ञान धन से अन्य लोगों को शिक्षा देकर उनकी भी ज्योत जलानी है । स्थूल पैसे, धन तो जितना खर्च करें उतना कम होता जाता है परंतु ज्ञानधन एक ऐसा धन है जिसे हम ज्ञानधन जिस किसीको जितना बांटते हैं यह उतना ही बढ़ता है । तो एक हुवा की हमें अपने पुराने स्वभाव संस्कार का त्याग कर नए स्वभाव संस्कार धारण करने हैं अर्थात स्वपरिवर्तन से आत्म चेतना की ज्योत जगानी है फिर अन्य की ज्योत जगानी है । दूसरा हुवा की अपने मन बुध्धि की सफाई कर सच्चाई को धारण करना है । पुराने कड़वाहट भरे अनुभवों को मन से मुक्त कर हल्का होना है । लक्ष्मी सरस्वती व गणेश जी के गुणों का आव्हान अपने जीवन मे करना है जिससे जीवन धन्य हो ।

