6 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों तक नल जल कनेक्शन पहुंचा 31 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण घरों को कवर किया

 


जल जीवन मिशन के अंतर्गत 278 लाख परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया

6 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों तक नल जल कनेक्शन पहुंचा 31 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण घरों को कवर किया

जल जीवन मिशन के तहत 278 लाख घरों को नल जल कनेक्शन प्रदान किया गया है। 15 अगस्त, 2019 को इसकी घोषणा की गई थी। फिलहाल देश के 6.01 करोड़ ग्रामीण घरों में नल के माध्यम से अपने घरों में पीने योग्य पानी मिल रहा है। देश भर में 18 जिलों ने सभी घरों में नल जल कनेक्शन प्रदान किए हैं और हर घर में नल का जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। मंत्रालय की वेबसाइट (Https://ejalshakti.gov.in/jjmreport/JJMIndia.aspxपर अभियान की प्रगति के बारे में जानकारी उपलब्ध है।  

 

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जल शक्ति मंत्रालय देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में नल जल कनेक्शन के माध्यम से नियमित और दीर्घकालिक आधार पर निर्धारित गुणवत्ता के लिए पर्याप्त मात्रा में पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्यों के साथ साझेदारी में जल जीवन मिशन को 2024 तक लागू करने में जुटा है।


मिशन के अस्तित्व में आने के बादराज्यों से आधारभूत डेटा के पुनर्मूल्यांकन कार्य का अनुरोध किया गया थाउसके अनुसार देश में 19.05 करोड़ ग्रामीण परिवार हैंजिनमें से 3.23 करोड़ परिवारों को पहले ही नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए थे। शेष 15.81 करोड़ घरों में नल जल कनेक्शन दिए जाने हैं। इस प्रकारपहले से ही दिए गए कनेक्शनों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करते हुए समयबद्ध तरीके से लगभग 16 करोड़ परिवारों को कवर करने का लक्ष्य है। इसका मतलब है कि हर साल लगभग 3.2 करोड़ परिवारों को कवर किया जाना हैयानी दैनिक आधार पर 88,000 नल जल कनेक्शन प्रदान किए जाने हैं। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुएराज्य केन्द्र शासित प्रदेश ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल कनेक्शन प्रदान करने के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं।

 

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2020-21 मेंजल जीवन मिशन के कार्यान्वयन के लिए 23,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, 2020-21 मेंग्रामीण स्थानीय निकायों को 15वें वित्त आयोग का 50 प्रतिशत अनुदानयानी 30,375 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जा रहा हैजिसका उपयोग जलापूर्ति और स्वच्छता के लिए किया जाएगा। इससे गांवों में पेयजल आपूर्ति प्रणालियों के बेहतर नियोजनकार्यान्वयनप्रबंधनसंचालन और रखरखाव में मदद मिलेगीताकि लोगों को नियमित और दीर्घकालिक आधार पर पीने योग्य पानी मिलता रहे।


यह मिशन संयुक्त राष्ट्र एजेंसियोंगैर-सरकारी संगठनों सीबीओसीएसआर संगठनोंट्रस्टोंप्रतिष्ठानों आदि सहित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों से साझेदारी कायम कर रहा है। सरकार को उम्मीद है कि जल एक जन आंदोलन में बदल जाएगा और सभी के लिए एक सुविधा के साथ ही एक बदलाव साबित होगा, जिसे केवल सार्वजनिक क्षेत्र की जिम्मेदारी के रूप में देखा गया है।


विभिन्न राज्यों केंद्र शासित प्रदेशों ने 2024 से पहले मिशन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता दर्शायी है। गोवा ने पहले ही सभी घरों में नल जल आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। 2021 मेंबिहारपुद्दुचेरी और तेलंगाना ने सभी घरों में नल का जल कनेक्शन प्रदान करने की योजना बनाई है। इसी प्रकारगुजरातहरियाणाहिमाचल प्रदेशजम्मू-कश्मीरलद्दाखमेघालयपंजाबसिक्किम राज्यों केंद्र शासित प्रदेशों ने 2022 के लिए योजना बनाई है। कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश, केरलमध्य प्रदेशमणिपुरमिजोरमनगालैंडत्रिपुराछत्तीसगढ़ ने 2023 में 100 प्रतिशत कवरेज की योजना बनाई है। असमआंध्र प्रदेशझारखंडमहाराष्ट्रओडिशाराजस्थानतमिलनाडुउत्तर प्रदेशउत्तराखंडपश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने 2024 के लिए योजना बनाई है।


मिशन का उद्देश्य व्यापक कवरेज है और 'इक्विटी और समावेशके सिद्धांत पर जोर दिया गया हैयानी गांव के प्रत्येक परिवार को अपने घर में नल जल कनेक्शन मिले और 'कोई भी पीछे नहीं रहे। इसके अनुसारराज्य अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के बहुसंख्यक आबादी वाले गांवोंमहत्वकांक्षी जिलोंसूखे की आशंका वाले इलाकों और रेगिस्तानी इलाकों और गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं।


जल गुणवत्ता प्रभावित बस्तियों में पीने योग्य पानी की आपूर्ति जल जीवन मिशन के तहत एक सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्यों को दिसंबर, 2020 से पहले आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित बस्तियों के सभी घरों में पाइप द्वारा जलापूर्ति सुनिश्चित करनी है।


विकेंद्रीकृत कार्यक्रम होने के नातेग्राम पंचायत की उप-समिति के रूप में ग्राम जल और स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी)/ पानी समितिग्रामीण स्तर पर न्यूनतम 50 प्रतिशत महिला सदस्यों के साथ बनाई जा रही हैजो जल-स्रोतों के विकासआपूर्तिग्रे-वाटर प्रबंधन और संचालन और रखरखाव पर विचार करते हुए 5 वर्षीय ग्राम कार्य योजना (वीएपीतैयार करने के लिए जिम्मेदार है। जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्राम पंचायत और या इसके उप-समितियों के सदस्यों की क्षमता निर्माण हैजो ग्राम स्तर पर उत्तरदायीऔर 'जिम्मेदारनेतृत्व का विकास करते हैंजो गाँव की जल आपूर्ति अवसंरचना का प्रबंधनयोजनासंचालन और रख-रखाव कर सकते हैं।


जल जीवन मिशन के तहतनिम्नतम स्तर अर्थात् ग्राम ग्राम पंचायत में स्रोत के सुदृढ़ीकरण, अभिसरण योजनामहात्मा गांधी नरेगाजल संचयनजलभराव पुनर्भरणजल उपचार और धूसर जल प्रबंधन इत्यादि पर बल दिया जाता है। पंचायती राज संस्थाओं के लिए 15वें वित्त आयोग से प्राप्त अनुदानएसबीएम (जी), जिला खनिज विकास कोषसीएसआर निधिस्थानीय क्षेत्र विकास निधि इत्यादि के लिए अनुदान से संसाधनों के विकास के लिए व्यय की जाती है।


ग्रामीणों को चिनाईप्लंबिंगबिजली के पहलुओंमोटर-मरम्मतआदि के बारे में जानकारी देकर भी मिशन के तहत प्रोत्साहन दिया जाता है, ताकि ग्रामीण स्तर पर मानव संसाधन को प्रशिक्षित किया जा सके।


पेयजल परीक्षण प्रयोगशालाओं के माध्यम से आपूर्ति किए गए पानी की गुणवत्ता की निगरानी एक महत्वपूर्ण पहलू है और इन प्रयोगशालाओं को सशक्त करने और उन्हें एनएबीएल द्वारा मान्यता दिलाने पर बहुत जोर दिया जाता है। राज्यों की ओर से आम जनता के लिए पानी की गुणवत्ता प्रयोगशाला सुविधाएं स्थापित की जाएंगीताकि किसी गांव की एक महिला भी अपने घर में आपूर्ति किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता का परीक्षण कर सकें।


पानी की आपूर्ति की गुणवत्ता के लिए समुदायों को निगरानी करने में सक्षम बनाया जा रहा हैजिसके लिए गांवों में पांच ग्रामीणों को प्रशिक्षित करकेविशेषकर महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि गांवों में आपूर्ति किए जाने वाले पानी का स्थानीय स्तर पर परीक्षण किया जा सके। विचार यह है कि इसे पीने योग्य आपूर्ति की एक विश्वसनीय और भरोसेमंद व्यवस्था बनाया जाए।


वित्तीय समावेशनमकानसड़कस्वच्छ ईंधनबिजलीशौचालय जैसी सुविधाएं प्रदान करकेप्रधानमंत्री द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन-यापन में सुगमता सुनिश्चित करने की अपील के साथ-साथजल जीवन मिशन प्रत्येक ग्रामीण घरों में पीने का पानी उपलब्ध करा रहा हैजिससे ग्रामीण आबादी के जीवन में सुधार के लिए एक लंबा रास्ता तय हो सकेगा। यह मिशन उन महिलाओं और लड़कियों के कठिन परिश्रम को भी कम करेगाजिन पर पानी लाने की प्राथमिक जिम्मेदारी निहित है।

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