उरगा मार्ग पर टायर फटा पिकअप का, पांच श्रमिक घायल

**छत्तीसगढ़ सेवा न्यूज कोरबा से द्वारिका यादव की रिपोर्ट **

कोरबा। 38 मजदूरों से खचाखच भरी मालवाहक वाहन पिकअप तेज रफ्तार में एक टैंकर को ओवरटैक करने की कोशिश की और अनियंत्रित हो पलट कर दो गुलाटी खाकर फिर से गाड़ी खड़ी हो गई। इस दौरान एक बाइक में सवार तीन लोग चपेट में आ गए। वहीं पिकअप में सवार 38 मजदूरों में पांच गंभीर रूप चोटें आई। सभी को उपचार के लिए जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है। दो की स्थिति नाजूक होने पर सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।

यह घटना कोरबा- चांपा मार्ग में गौमाता चौक के पास हुई। बताया जा रहा है कि रेलवे स्टेशन के निकट इन दिनों रेल लाइन का काम चल रहा है। हर रोज ठेका कंपनी की पिकअप क्रमांक सीजी-12एपी-3638 के डाला में मजदूरों को भर कर कार्यस्थल लाया जाता है और वापस पुन: शाम को घर छोड़ते हैं। शुक्रवार को शाम 5.30 बजे पिकअप में रेल लाइन में काम करने वाले 38 मजदूरों को घर छोडऩे चांपा मार्ग में रवाना हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गाड़ी को ओवहरलोड होने के बाद भी चालक तेज रफ्तार में लापरवाही पूर्वक वाहन चला रहा था। चांपा की ओर जा रही एक टैंकर को ओवहरटेक करने के चक्कर में पिकअप अनियंत्रित हो गई। सडक़ में दो बार पलटी खाने के बाद पिकअप उल्टी दिशा में फिर खड़ी हो गई। इस बीच उरगा की ओर से आ रहे बांकीमोंगरा में रहने वाले बाइक सवार मोहम्मद शमसेर व उसकी पुत्री फर्जाना 15 साल, पुत्र मोहम्मद सदाब सात साल पिकअप की चपेट में आ गए। बाइक पिकअप के नीचे दब तक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं तीनों घायल हो गए। उधर पिकअप में सवार लगभग सभी मजदूरों को चोटें आई। सभी घायलों को मौके पर पहुंचे कोतवाली टीआई दुर्गेश शर्मा व 112 की टीम ने अस्पताल पहुंचाया। पांच मजदूर पूर्णिमा चौहान पति राम प्रसाद 19 वर्ष, बुधराम, चंद्रेश, श्याम कुमार व श्याम को जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पूर्णिमा व बुधराम की हालत ज्यादा खराब होने की वजह से उन्हें बिलासपुर अस्पताल रेफर कर दिया गया है। घायल अन्य मजदूरों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। वहीं मोहम्मद शमसेर व उनके दोनों बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही। शमसेर उरगा में रहने वाले अपने साढ़ू के घर से वापस लौट रहे थे। 


पुलिस ने इस मामले में पिकअप चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

पिकअप का नियमित चालक अवकाश में था, इसकी जगह किसी अन्य चालक को मजदूरों को लेने भेजा गया था। सवाल यह उठता है कि ठेका कंपनी यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए हर रोज पिकअप वाहन में मजदूरों को जानवरों की तरह ठूंस कर यात्रा कराती रही। इससे बेहद गंभीर बात तो यह है कि सीतामणी के पास यातायात थाना की अस्थाई चौकी संचालित है। इसके बाद भी आज तक मजदूरों को ढोने वाले पिकअप के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और यह बड़ा हादसा हो गया।

इसके पहले भी मालवाहक वाहनों में सवारी ढोने की वजह से कई बड़े हादसे हो चुके हैं। कोरोना काल में लाकडाउन की वजह से इस तरह की घटनाओं में विराम लगा रहा। अब एक बार फिर विवाह का दौर चल रहा। ग्रामीण क्षेत्र में बारात के लिए मालवाहक वाहन का ही उपयोग किया जाता है। बड़ी दुर्घटना होने के बाद ही पुलिस इस तरह के मामलों में अंकुश चलाने अभियान चलाती है।

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