गजब की पहुँच....!एक हाथी की मौत पर प्रभारी डीएफओ संत निलंबित, दो हाथी शावक और एक तेंदुआ की मौत तथा कई गंभीर आरोप लगने के बाद भी डीएफओ फारुखी यथावत, कार्यवाही तो दूर तबादला सूची में भी नाम नही

 गजब की पहुँच....!एक हाथी की मौत पर प्रभारी डीएफओ संत निलंबित, दो हाथी शावक और एक तेंदुआ की मौत तथा कई गंभीर आरोप लगने के बाद भी डीएफओ फारुखी यथावत, कार्यवाही तो दूर तबादला सूची में भी नाम नही


छत्तीसगढ़ सेवा न्यूज कोरबा से द्वारिका यादव की रिपोर्ट
कोरबा/कटघोरा:- वनमंडल कटघोरा में पदस्थ डीएफओ शमा फारुखी की पहुँच प्रदेश के एक मंत्री तक है।शायद इसीलिए केंदई रेंज के अंतर्गत ग्राम कुल्हड़िया गांव के समीप साल्ही पहाड़ के नीचे गत 28 दिसंबर 2019 को हुए एक मादा हाथी की मौत मामले को लेकर प्रभारी डीएफओ डी.डी. संत को सीधे तौर पर निलंबित कर दिया जाना जबकि वर्तमान डीएफओ शमा फारुखी के कार्यकाल में दो हाथी के शावक एवं एक तेंदुआ की मौत के अलावा उनके विरुद्ध लगे कई गंभीर आरोप एवं शिकायतों के बाद भी कार्यवाही तो दूर वन मंत्रालय के तबादला नीति में नाम शामिल ना होना डीएफओ के गजब की पहुँच को दर्शाता है।

ज्ञात हो कि वनमंडलाधिकारी शमा फारुखी के बीतने जा रहे एक वर्ष के कार्यकाल में केंदई वनपरिक्षेत्र अंतर्गत दो हाथी शावक एवं वनपरिक्षेत्र जटगा में एक तेंदुआ की मौत हो जाना इसके अलावा उनके विरुद्ध कटघोरा वनमंडल क्षेत्र में कराए जा रहे विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्यों में भ्रष्ट्राचार और उन कार्यों में नियोजित मजदूरों की मजदूरी लंबित रखने के साथ अन्य विभागीय कार्यों के भुगतान में भी रुचि ना लेने व स्थानीय ठेकेदारों की फाइल बेवजह लटका कर रखने का गंभीर आरोप लगे होने के साथ शिकायतें भी हुई है।बावजूद इसके उन पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही होना तो दूर की बात बीते मंगलवार 8 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के वन मंत्रालय द्वारा जारी तबादला सूची में भी उनका नाम नही होना दमदार पहुँच की ओर इंगित करता है।छत्तीसगढ़ शासन वन मंत्रालय से आईएफएस अधिकारियों के तबादला सूची जारी होने की गतिविधि के बीच यह विभागीय एवं आम चर्चा का बाजार गर्म था कि अनेक आरोपों एवं शिकायतों से घिरे वनमंडलाधिकारी के तबादले को लेकर वन मंत्रालय विचार कर सकता है और उनको उनके मूल पदस्थापना पर वापस भेजा जा सकता है।लेकिन इस चर्चा के विपरीत जारी तबादला सूची में उनका नाम ना होने से कयासो के बाजार पर विराम लग गया।बताया जा रहा है कि मैडम की पकड़ विभागीय मंत्री तक है।इसीलिए वे कटघोरा वनमंडल की कुर्सी पर अबतक जमे हुई हैं वरना एक हाथी की मौत मामले को लेकर प्रभारी डीएफओ संत को सीधे तौर पर निलंबित कर दिया जाना तथा मैडम के कार्यकाल में दो हाथी शावक के अलावा एवं तेंदुआ की मौत हो जाने के अतिरिक्त अनेक आरोप व शिकायतों के बावजूद भी वनमंडल की मलाईदार कुर्सी पर विराजमान रहने का सवाल ही नही बनता।यही कारण है कि इस प्रकार के प्रश्रय से विभागों में मनमानी व भ्रष्ट्राचार को बल मिलता है।

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