गोधन न्याय योजना की वेबसाइट और मोबाइल एप को मिला राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार

डिजिटल गवर्नेंस श्रेणी में “अवार्ड आफ एक्सीलेंस” से सम्मानित

देश की ख्याति प्राप्त आई.टी. संस्था एलेट्स टेक्नोमिडिया ने दिया पुरस्कार

वर्चुअल समारोह में दिया गया पुरस्कार

चिप्स द्वारा विकसित किया गया है मोबाइल एप और वेबसाईट

कृषि उत्पाद आयुक्त एवं सचिव कृषि विभाग डॉ. एम. गीता को किया गया सम्मानित

 

 छत्तीसगढ़ में कृषि विभाग द्वारा संचालित गोधन न्याय योजना के लिए चिप्स द्वारा विकसित वेबसाइट और मोबाइल एप को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिला है। देश की ख्याति प्राप्त आई.टी. संस्था एलेट्स टेक्नोमिडिया ने डिजिटल गवर्नेंस श्रेणी में गोधन न्याय योजना को वर्चुअल समारोह में “अवार्ड आफ एक्सीलेंस” प्रदान किया है। वर्चुअल समारोह में छत्तीसगढ़ की कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव कृषि विभाग डॉ. एम. गीता सम्मानित किया गया। 


    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरेली पर्व पर गोबर खरीदी की गोधन न्याय योजना की शुरूआत की है। इस योजना में दो रूपए प्रति किलो की दर पर गौठानों में गोबर खरीदी की जा रही है। खरीदे गए गोबर से वर्मी कम्पोस्ट सहित दीये, गमले, अगरबत्ती जैसे उत्पाद महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। इस योजना से जहां पशुपालकों को पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने में सहयोग मिल रहा है, वहीं बड़ी संख्या में महिला समूहों को रोजगार और वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।  


    चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  समीर विश्नोई ने यह जानकारी देते हुए बताया कि चिप्स की ओर से गोधन न्याय योजना की वेबसाईट एवं मोबाइल एप निर्माण करने वाले प्रभारी अधिकारी नीलेश सोनी ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। 


    उल्लेखनीय है कि चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी समीर विश्नोई के नेतृत्व में चिप्स ने अत्यंत अल्प अवधि और न्यूनतम लागत में इनहाउस इस वेबसाईट एवं मोबाइल एप निर्माण का निर्माण किया है।


    चिप्स द्वारा विकसित गोधन न्याय योजना की वेबसाईट एवं मोबाइल एप के विषय में बताते हुए श्री विश्नोई ने कहा कि अब प्रदेश के गोबर विक्रेताओं को घर पर ही ऑनलाइन भुगतान प्राप्त हो रहा है और गोबर विक्रय के संबंध में विस्तृत जानकारी मिल रही है। एप के माध्यम से नवम्बर माह तक 2 लाख 18 हजार 600 से अधिक गोबर विक्रेताओं का पंजीकरण किया जा चुका है और लगभग 25 लाख क्विंटल का क्रय एप के माध्यम से किया जा चुका है। एप के माध्यम से गोबर विक्रेताओं के साथ स्व-सहायता समूह को भी जोड़ा जा चुका है। साथ ही इस एप द्वारा गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने की जानकारी एवं विक्रय की व्यवस्था भी की गई है।

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