केन्द्र सरकार द्वारा कानून को डेढ़ साल के लिए स्थगित रखना आंदोलन को कमजोर करने की साजिश है

 राजिम विधानसभा से संवाददाता नेहरू साहू कि रिपोर्ट

आंदोलन के  57 वें दिन सिंघु बार्डर पर छत्तीसगढ़ से तेजराम विद्रोही, सौरा यादव, मदन लाल साहू, राधेश्याम शर्मा और केरल के एन डी वेणु रहे भूख हड़ताल पर

केन्द्र सरकार द्वारा लाये गए कॉरपोरेट परस्त किसान, कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी कानून को रद्द करने व न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून लागू करने की मांग को लेकर दिल्ली के विभिन्न सीमाओं में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में छत्तीसगढ़ से गये किसानों की जत्थे ने सिंघु बार्डर में जारी तमाम विरोध प्रदर्शनों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

आंदोलन के 57 वें दिन आदिवासी भारत महासभा के संयोजक सौरा यादव,  अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष मदन लाल साहू, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा  के सचिव व छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संचालक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही, सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा, क्रांतिकारी नौजवान भारत सभा के एन डी वेणु क्रमिक भूख हड़ताल में सम्मिलित रहे। 


अनशनकारियों ने कहा कि 20 तारीख को बैठक के दौरान केंद्र सरकार द्वारा किसान प्रतिनिधियों के समक्ष यह प्रस्ताव रखना कि इस कानून को हम डेढ़ साल के लिए स्थगित रखेंगे और दोनों पक्षों को लेकर कमेटी बनाकर इस चर्चा करेंगे। यह बात सरकार द्वारा अपने ओर से कोई नई बात नहीं है क्योंकि कोर्ट ने पहले ही इस कानून के पालन पर रोक लगा दिया है और स्वयं कोर्ट ने चार लोगों की कमेटी बनाई थी जो किसानों से चर्चा कर इस मामले को सुलझाने में मदद करता लेकिन कमेटी के एक सदस्यभूपेंद्र सिंह मान  ने स्वयं को कमेटी से अलग कर लिया जिससे कमेटी का कोई महत्त्व नहीं रह जाता है। अब पुनः सरकार प्रयास कर रही है कि कानून को स्थगित रखकर और कमेटी बनाकर किसानों के आंदोलन को कमजोर किया जाये। यह केन्द्र सरकार की साजिश है जबकि सरकार को  किसानों के आंदोलन को समझते हुए यह कानून तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।

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