राजिम विधानसभा संवाददाता नेहरू साहू कि रिपोर्ट
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष मदन लाल साहू ने कहा की देश के सर्वोच्च न्यायालय ने केंन्द्र सरकार द्वारा थोपे गए तीनो कृषि कानून के अमल पर रोक लगा दी है जो केन्द्र की मोदी सरकार की नैतिक हार है। केंद्र सरकार अपनी तानाशाही रवैया त्यागकर कृषि,किसान और आम उपभोक्ता विरोधी तीनो काला कानून वापस लें।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा लगातार इस काले कानून का विरोध कर रही है और यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इसे वापस नही ले लेती।
केन्द्र सरकार द्वारा कृषि को कारपोरेट घरानों के हवाले करने के लिए ही यह तीनो काला कानून लाया गया है। प्रधानमंत्री कोरोना का बहाना त्याग बिना कोई देरी किए संसद सत्र बुलाए और तीनो काला कानून वापस लेकर "न्युनतम समर्थन मूल्य गारंटी"का कानून बनाए।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा छत्तीसगढ़ कमेटी देशब्यापी किसान आंदोलन में शहादत देने वाले किसान साथियो को नमन करता है। साथ ही आंदोलित किसानो को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले भाजपा नेताओं की कड़ी निंदा करता है। राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडेय को अपने किसान विरोधी बयान के लिए सार्वजनिक रुप से माफी मांगना चाहिए।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष मदन लाल साहू ने कहा की देश के सर्वोच्च न्यायालय ने केंन्द्र सरकार द्वारा थोपे गए तीनो कृषि कानून के अमल पर रोक लगा दी है जो केन्द्र की मोदी सरकार की नैतिक हार है। केंद्र सरकार अपनी तानाशाही रवैया त्यागकर कृषि,किसान और आम उपभोक्ता विरोधी तीनो काला कानून वापस लें।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा लगातार इस काले कानून का विरोध कर रही है और यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इसे वापस नही ले लेती।
केन्द्र सरकार द्वारा कृषि को कारपोरेट घरानों के हवाले करने के लिए ही यह तीनो काला कानून लाया गया है। प्रधानमंत्री कोरोना का बहाना त्याग बिना कोई देरी किए संसद सत्र बुलाए और तीनो काला कानून वापस लेकर "न्युनतम समर्थन मूल्य गारंटी"का कानून बनाए।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा छत्तीसगढ़ कमेटी देशब्यापी किसान आंदोलन में शहादत देने वाले किसान साथियो को नमन करता है। साथ ही आंदोलित किसानो को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले भाजपा नेताओं की कड़ी निंदा करता है। राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडेय को अपने किसान विरोधी बयान के लिए सार्वजनिक रुप से माफी मांगना चाहिए।

