उपवनमण्डल कटघोरा एसडीओ प्रहलाद यादव का पाली रेंजर रहने के दौरान कारनामा.....नाली की विभागीय स्वीकृति का अता- पता नही और पूर्व से खोदवा लिए गए गड्ढे, अब बड़े व बच्चे गिरकर हो रहे चोटिल

 

**छत्तीसगढ़ सेवा न्यूज कोरबा से द्वारिका यादव की रिपोर्ट **

कोरबा/पाली:- एक चर्चित कहावत है कि शहनाई बजी ही नही और भविष्य में आने वाले बच्चे का करने चले नामकरण, कुछ ऐसा ही कारनामा कटघोरा वनमंडल के उपवनमण्डल कटघोरा में पदस्थ एसडीओ प्रहलाद यादव ने तत्कालीन पाली रेंजर रहने के दौरान कर दिखाया जिसमे नाली निर्माण कार्य की विभागीय स्वीकृति का कुछ अता- पता ही नही था और पूर्व से ही उक्त निर्माण कार्य के लिए लंबे- चौड़े गड्ढे खोदवाकर छोड़ दिये गए अब उन गड्ढे पर बड़े व बच्चे गिरकर आए दिन चोटिल हो रहे है।


वैसे तो कटघोरा उपवनमण्डल के वर्तमान एसडीओ प्रहलाद यादव द्वारा अपने तत्कालीन रेंजर कार्यकाल के दौरान जंगल मे मंगल की कहावत को चरितार्थ कर दिखाया जहाँ पाली रेंज में रहने के दौरान उन्होंने तालाब- डबरी, बोल्डर चेकडेम, स्टॉफडेम, पहुँचमार्ग, पौधारोपण के कार्यों पर जमकर भ्रष्ट्राचार के कारनामें को अंजाम दिए।लेकिन उनका यह कारनामा सबसे हटकर है।जिसमें श्री यादव द्वारा गुजरे वर्ष 2020 के माह अगस्त- सितंबर में नाली निर्माण कराने के नाम पर पाली रेंज स्थित फारेस्ट कालोनी में लंबे- चौड़े गड्ढे खोदवा लिए गए जबकि उस समय नाली निर्माण कार्य के लिए कटघोरा वनमंडल से किसी भी प्रकार की कोई स्वीकृति पाली रेंज को मिली ही नही थी लेकिन मौखिक रूप से हुए वनमंडल के प्रस्ताव को लेकर साहब ने भी अपनी बुद्धि दौड़ाई और आने वाले आगे के दिनों में विभागीय तौर पर नाली निर्माण किया जाना है यह सोचकर ठेकेदार के माध्यम से पहले ही फारेस्ट कालोनी के चारो ओर लंबे- चौड़े गड्ढे खोदवा लिए गए।जिसके बाद बारी आई नाली निर्माण कार्य की तब उक्त निर्माण की स्वीकृति विभाग से तो मिली ही नही थी ऐसे में साहब अपनी ही बातों में फंसकर रह गए और तब उक्त हालात में कार्य के स्वीकृति से पहले जिस ठेकेदार को नाली निर्माण का जिम्मा सौंपा था उसे अपनी बातों में उलझाकर रखे हुए थे और ऐसा करते भी क्यों नही क्योंकि कटघोरा वनमंडल से नाली निर्माण कार्य कराए जाने का उन्हें कोई जिम्मा ही नही मिला था ऐसे में बात बनाना तो बनता ही है।रेंजर रहे प्रहलाद यादव के गले की फांस तब निकली जब वे राज्य शासन से एसडीओ के पद पर पदोन्नत होकर कटघोरा वनमंडल के उपवनमण्डल में चले गए।जहां अपने इस कारनामे को लेकर फिलहाल वे भले ही राहत महसूस कर रहे हों लेकिन जो गड्ढा उनके द्वारा खोदवाकर चल दिए गए वह आज भी जस का तस पड़ा हुआ खतरनाक साबित हो रहा है।जिसमे आए दिन कालोनी के बड़े एवं बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे है।और वे सभी गड्ढे खोदवाने वाले को जी भरकर कोस रहे है।फिलहाल एसडीओ श्री यादव का तत्कालीन रेंजर रहने के दौरान यह पहला कारनामा नही है बल्कि इससे भी बड़ा- बड़ा कारनामा उन्होंने कर दिखाया है जहाँ केंदई रेंजर रहने के दौरान दूसरे वनमंडल के द्वारा कराए गए कार्य को अपना बताकर कटघोरा वनमंडल से उसी कार्य के लिए स्वीकृत लाखों की राशि को कैसे हजम कर गए उनके इस कारनामे को खबर के रूप में सामने लाया जाएगा।

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