चोटिया भू प्रभावितो को नौकरी से निकाले जाने पर बिफरे सांसद प्रतिनिधि प्रशांत मिश्रा, कोल माइंस संचालनकर्ता बाल्को प्रबंधन के तानाशाही रवैये को लेकर सीएम भूपेश बघेल से की गई शिकायत, कड़ी कार्यवाही की मांग


छत्तीसगढ़ सेवा न्यूज कोरबा से द्वारिका यादव की रिपोर्ट

कोरबा:- भोले- भाले भू विस्थापितों को सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर और भूमि अधिग्रहण के बाद महज कुछ साल की नौकरी देकर तथा अब उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए नौकरी से निकालने, जबरदस्ती वीआरएस दिलाने जैसे रवैये को लेकर सांसद प्रतिनिधि प्रशांत मिश्रा बाल्को प्रबंधन पर जमकर भड़के हुए है तथा इस तानाशाहीपूर्ण कार्य की शिकायत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से करते हुए प्रबंधन पर कड़ी कार्यवाही करने के साथ भू प्रभावितों के हित मे मांग की गई है।

कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा तहसील अंतर्गत चोटिया में स्थित कोल माइंस का संचालन वर्तमान में बाल्को प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है।इसके पूर्व यह खदान प्रकाश इंडस्ट्रीज के अधीन थी किंतु अब बाल्को के द्वारा इस खदान का संचालन किया जाने के साथ ही जनहित और भू  विस्थापितों की समस्या को लेकर किनारा करना प्रारंभ कर दिया है और प्रभावित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं सहित पूर्व के बने अस्पताल व स्कूल भवन यहां तक कि सड़कमार्ग का भी रखरखाव बंद कर दिया है।जिससे हालात बदत्तर हैं।जनप्रतिनिधियों द्वारा इस ओर बालकों प्रबंधन का बार-बार ध्यान आकर्षित कराए जाने के बाद भी प्रबंधन के कानों में जूं तक नही रेंग रही।उक्त समस्याओं से जूझ रहे कोल माइंस के कर्मचारियों एवं क्षेत्र के लोगों पर उस वक्त कुठाराघात हुआ जब बालकों ने 07 अक्टूबर 2020 को भूविस्थापित कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करने के लिए वीआरएस का फरमान जारी किया और इसके लिए प्रलोभन एवं दबाव भी बनाया गया।खदान बंद करने या अन्य को बेचे जाने की मानसिकता को लेकर बाल्को में केवल भूविस्थापित कर्मचारियों पर दबाव डालकर वीआरएस फॉर्म भरवाया जाना, जिन लोगों ने फार्म भरने से इनकार कर दिया उनका स्थानांतरण कर दिया जाना और स्थानांतरण भी ऐसा कि 10 अक्टूबर 2020 को बालको से ऐसे भुप्रभावितो का स्थानांतरण सीधे कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, वडोदरा और फरीदाबाद जैसी जगह पर किया गया और लिखित फरमान के तहत उन्हें 72 घंटे के अंदर वहां जॉइनिंग करने को कहा गया।अब ऐसे बोगस आदेश को मानते हुए हजारों किमी दूर आने जाने में ही महज 2 से 3 दिन लग सकते हैं वही नई जगह होने के कारण भी वे अनभिज्ञ व अनजान हैं।ऐसे में उन्हें किसी भी तरह का समय नहीं दिया जाना अंग्रेजों के जमाने से भी बढ़कर तुगलकी फरमान है।डरा- धमकाकर विस्थापित कर्मचारियों से जबरन फार्म भरवाया गया और उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। इसके एवज में बालको द्वारा 50000 प्रति वर्ष के हिसाब से शेष बची नौकरी का भुगतान किया जाना बताया गया जिसकी अधिकतम राशि सात लाख रुपए तय की गई जबकि ज्यादातर लोगों को कुल 2 से 3 लाख रुपए ही मिल पाया।पहले लोक लुभावने झांसे देकर इन गरीबों की जमीने छीनी गई और अब नौकरी से बेदखल किया जा रहा है।इसे लेकर कोरबा सांसद प्रतिनिधि व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महासचिव प्रशांत मिश्रा बाल्को प्रबंधन पर जमकर भड़के हुए है तथा उनके खिलाफ आक्रोश जताते हुए इसकी शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से करते हुए मामले को संज्ञान में लेकर त्वरित कार्यवाही के तहत भू विस्थापितों को उनकी जमीन बालकों से वापस दिलवाने या फिर उन्हें नौकरी पर वापस लेने की पहल करने की मांग की है, साथ ही साथ उन्होंने खदान को यदि किसी दूसरे को स्थानांतरित या विक्रय किए जाने की स्थिति में भी प्रभावित ग्रामीणों की नौकरी यथावत रखे जाने की मांग की है और बालकों के इस तानाशाही रवैया के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी की है।

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