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फरवरी, 2021 महीने के लिए कृषि श्रमिकों और ग्रामीण श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या(आधार: 1986-87 = 100), 1 अंक गिरकर 1037 (एक हजार सैंतीस) और 1044 (एक हजार चौंवालीस) अंक पर पहुंच गया है।
- कृषि श्रमिकों और ग्रामीण मजदूरों के सामान्य सूचकांक में गिरावट के लिए प्रमुख योगदान भोजन से (-) 2.94 और (-) 2.54 11.40 अंक का, मुख्य रूप दाल, प्याज, आलू, फूलगोभी, बैगन आदि की कीमतों में गिरावट के कारण था।
- सीपीआई- एएल और सीपीआई- आरएल के आधार पर मुद्रास्फीति की दर इंगित करते हुए फरवरी में क्रमशः 2.67% और 2.76% हो गई जो जनवरी 2021 में क्रमश: 2.17 फीसदी और 2.35 फीसदी रहा था।
- सीपीआई- एएल और सीपीआई- आरएल के आधार पर मुद्रास्फीति की दर इंगित करते हुए फरवरी में क्रमशः 2.67% और 2.76% हो गई जो जनवरी 2021 में क्रमश: 2.17 फीसदी और 2.35 फीसदी रहा था।
- इसी तरह, सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल के खाद्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर क्रमशः (+) 1.55% और (+) 1.85% हो गई जो जनवरी 2021 में क्रमश: 1.02% और 1.22 फीसदी था।
राज्यों के बीच:
- कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के मामले में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या में अधिकतम कमी पश्चिम बंगाल राज्य (क्रमश: -20 अंक और -19 अंक) में दर्ज की गई।
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कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के मामले में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या में अधिकतम वृद्धि केरल राज्य (+11 अंक प्रत्येक) में दर्ज की गई।
कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में (आधार: 1986-87 = 100) फरवरी, 2021 के दौरान 1 अंक की कमी आई यह घटकर क्रमश: 1037 (एक हजार और सैंतीस) और 1044 (एक हजार और चौंवालीस) पर रहा। कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के सामान्य सूचकांक में गिरावट में प्रमुख योगदान खाद्य के साथ क्रमशः (-) 2.94 अंक और (-) 2.54 अंकों का रहा है जो मुख्य रूप से गेहूं अटा, गुड़, आलू, फूलगोभी आदि की कीमतों में गिरावट के कारण हुआ।
विभिन्न राज्यों के सूचकांक में में भिन्नता है। कृषि मजदूरों के मामले में, इसने 10 राज्यों में 1 से 20 अंक की कमी और 8 राज्यों में 1 से 2 अंक की वृद्धि दर्ज की। 1252 अंकों के साथ तमिलनाडु राज्य सूचकांक तालिका में सबसे ऊपर है, जबकि 818 अंकों के साथ हिमाचल प्रदेश राज्य सबसे नीचे है।
ग्रामीण मजदूरों के मामले में, इसने 10 राज्यों में 1 से 19 अंक की कमी और 9 राज्यों में 1 से 11 अंक की वृद्धि दर्ज की। जबकि ओडिशा राज्य का सूचकांक स्थिर रहा। 1237 अंकों के साथ तमिलनाडु राज्य सबसे ऊपर रहा जबकि 842 अंकों के साथ बिहार राज्य सबसे नीचे रहा।
राज्यों के बीच, कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या में अधिकतम कमी पश्चिम बंगाल राज्य (-20 अंक और 19 अंक प्रत्येक) क्रमशः गेहूं आटा, मिर्च हरी, सब्जियां और फल और जलाऊ लकड़ी आदि की कीमतों में गिरावट के कारण हुआ था। इसके विपरीत फल आदि, कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या में अधिकतम वृद्धि क्रमशः केरल राज्य +115 अंक) मुख्य रूप से चावल, मछली ताजा, प्याज और सब्जियों तथा फलों आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण अनुभव की गई।
सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल के आधार पर मुद्रास्फीति की दर को इंगित करते हुए फरवरी, 2021 में बढ़कर 2.67% और 2.76 फीसदी हो गई है जो जनवरी 2021 में 2.17% और 2.35 थी। सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल के खाद्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति -आरएल फरवरी, 2021 में क्रमशः (+) 1.55% और (+) 1.85 है।
अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या (सामान्य और समूह-वार)


अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या (सामान्य और समूह-वार)
|
समूह |
कृषि श्रमिक |
ग्रामीण श्रमिक |
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|
जनवरी, 2021 |
फरवरी, 2021 |
जनवरी, 2021 |
फरवरी, 2021 |
|
|
सामान्य सूचकांक |
1038 |
1037 |
1045 |
1044 |
|
भोजन |
987 |
982 |
993 |
989 |
|
पान, सुपाडी, आदि |
1762 |
1781 |
1773 |
1793 |
|
ईंधन और बिजली |
1110 |
1110 |
1104 |
1104 |
|
वस्त्र, बिस्तर और जूते-चप्प्पल |
1031 |
1037 |
1050 |
1054 |
|
विविध |
1076 |
1082 |
1080 |
1085 |


नवीनतम सूचकांक के बारे में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संतोष गंगवार ने कहा, 'सूचकांक में कमी मुख्य रूप से गेहूं आटा और सब्जियों की कीमतों में गिरावट के कारण है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों मजदूरों की जेब पर कम बोझ डालकर उनकी परेशानी कम करेगा।'
श्रम ब्यूरो के महानिदेशक श्री डीपीएस नेगी ने सूचकांक जारी करते हुए कहा ‘फरवरी महीने के सीपीआई - एएल और आरएल में 1 अंक की कमी आई यह घटकर क्रमश: 1037 (एक हजार और सैंतीस) और 1044 (एक हजार और चौंवालीस) पर रहा। सूचंकाक में गिरावट का असर गेहूं आटा, गुड़, आलू, फूलगोभी आदि की कीमतों पर पड़ा है।'
मार्च, 2021 महीने के लिए कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 20 अप्रैल, 2021 को जारी किया जाएगा।

