23 मार्च शहादत दिवस पर किसानों ने निकाली बाइक रैली दिल्ली सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन का किया समर्थन

शहीदे आजम भगतसिंह, राजगुरू और सुखदेव के शहादत को 90 साल पूरा होने पर अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा छत्तीसगढ़ के नेतृत्व में किसानों ने    पंडित सुंदर लाल शर्मा चौक राजिम में नुक्कड़ सभा कर  अभनपुर बस स्टैंड तक मोटर  साइकिल रैली निकाली। इस दौरान नवापारा में सभा की गई। रैली अभनपुर के बस स्टैंड पहुंच कर नुक्कड़ सभा कर  कार्यक्रम की समाप्ति हुई।

सभा को संबोधित करते हुए  अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा , अभनपुर ब्लॉक के संयोजक हेमंत टंडन ने कहा कि शहीदों के सपनों का भारत बनना आज भी बाकी है। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ते हुए शहीदे आजम भगत सिंह ने कहा था कि गोरे अंग्रेज तो भारत से चले जायेंगे लेकिन क्या काले भारतीय पूंजीपतियों की गुलामी पसन्द करेंगे। जहाँ चंद पूंजीपति लोग मेहनतकश मजदूरों और किसानों का शोषण जारी रखेंगे। उन्होंने क्रांति का परिभाषा बताते हुए कहा था कि "क्रांति से हमारा अभिप्राय किसी का खून बहाने से नहीं है बल्कि इस शोषणकारी व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन से है।"

अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि भगतसिंह ने अपनी छोटी सी उम्र में धार्मिक कट्टरता,  अंधविश्वास, रूढ़िवाद पाखंड के खिलाफ युवाओं, किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों, महिलाओं को अपनी मुक्ति की संघर्ष में एकजुट होने का आह्वान किया था। आज के संदर्भ में हम पाते हैं कि शहीदों का सपना आज भी अधूरा है। उपनिवेशिक गुलामी के दौरान ब्रिटिश साम्राज्यवाद के सबसे बड़े दलाल ,देश के भीतर पल रहे संघी साम्प्रदायिक फासीवादी ताकतों ने 2014 के बाद और ज्यादा आक्रामक होते हुए आम जनता के सामने विकराल संकट पैदा किया है। बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, महिलाओं के ऊपर उत्पीड़न, शोषण, दमन, अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहा है। केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा बैंक, बीमा, रेल, शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य, एयरपोर्ट, सड़क जैसे तमाम सार्वजनिक संस्थानों को अडानी-अम्बानी जैसे बड़े उद्योगपतियों, कॉरपोरेट घरानों के हाथों कौड़ी के दाम बेचा जा रहा है। रोजगार के अवसर को समाप्त कर दिया गया है। और अब भारत की रीढ़ कहे जाने वाली कृषि क्षेत्र को कॉरपोरेट घरानों के हाथों में देने के लिए कृषि कानूनों के जरिये किसानों के मौत का फरमान जारी कर दिया है। जिसके खिलाफ किसान पिछले 9 महीने से लगातार आंदोलनरत हैं वही चार महीने से दिल्ली की सीमाओं के राष्ट्रीय राजमार्गों पर आंदोलन में डटे हुए हैं।

किसान सभा के सह सचिव ललित कुमार ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा
आज जारी किसान आंदोलन केवल कृषि कानूनों तक ही सीमित नहीं है। यह आंदोलन जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। क्योंकि यह जितना किसान और कृषि विरोधी है उतना ही आम उपभोक्ता विरोधी है क्योंकि इस कानून से किसान अपनी जमीन और फसल से वंचित तो हो ही जायेंगे खाद्यान्नों की जमाखोरी, कालाबाजारी, महंगाई और भी ज्यादा बढ़ेगी। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार सरकार की पेट्रोलियम मंत्रालय जरूर है लेकिन पेट्रोल डीजल की मनमाने दाम पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। वैसे भी जमाखोरी, कालाबाजारी का दंश देश की जनता ने कोरोना काल मे देख लिया है जहाँ 10 रुपये किलो का नमक 100 रुपये किलो और 5 रुपये का एक गुड़ाखु डिबिया 100 रुपये तक बिका है। यही हाल  दाल, चावल, प्याज ,आलू, तेल आदि दैनिक जीवन की वस्तुओं की होगी तो आम जनता का क्या होगा।
कार्यक्रम में पुनुराम, मोहनलाल, जहुर राम, लखबीर सिंह, भारत, देवसिंह, उत्तम कुमार, मनोज कुमार, राहुल कुमार,  रेखुराम, सोमन, नंदू आदि साथी उपस्थित रहे।

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