​​​​​​​किसानों को मौसम आधारित कृषि सलाह

 छत्तीसगढ़ के कृषि संचालनालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसम आधारित कृषि सलाह सलाह दी है कि आने वाले दिनों में तापमान में वृद्धि होने की संभावना हैं। अतः किसान भाइयों को सलाह दी हैं कि गेहूं एवं चने फसल की कटाई शीघ्र करें। परिपक्व गेहूं फसल की कटाई में समय एवं उर्जा की बचत हेतु ट्रेक्टर चालित रीपर या कम्बाइन हार्वेस्टर का उपयोग करें। ग्रीष्म कालिन धान की फसल में तना छेदक कीट के प्रकोप से फसल को बचाने हेतु प्रारम्भिक नियंत्रण के लिए प्रकाश प्रपंच अथवा फिरोमेन ट्रेप का उपयोग करें। आने वाले दिनों में तापमान में वृद्धि होने की संभावना हैं। अतः किसान भाइयों को सलाह दी जाती हैं कि ग्रीष्म कालीन धान में आवश्कतानुसार सिंचाई करें। मक्का फसल नरमंजरी अवस्था में होने पर नत्रजन की तीसरी मात्रा का छिड़काव करें। ग्रीष्म कालीन तिल फसल नही लगाई गई हैं तो खेत की जुताई कर बुवाई करें। तापमान में वृद्धि होने की संभावना को देखते हुए किसान भाइयों को सलाह दी जाती हैं कि मक्का फसल में आवश्कतानुसार सिंचाई करें।
ग्रीष्म कालीन फसल बोआई के पश्चात् सिंचाई करें। 
    इसी तरह बेल वाली फसलों की मचानध्सहारे को ठीक करें तथा कुंदरू एवं परवल में उर्वरक दे। ग्रीष्म कालीन साग-सब्जी फसलों में सिंचाई व्यवस्था ठीक से करें तथा तापमान कीट फैलने के लिए अनुकूल हैं उसको ध्यान में रखते हुए भिन्डी, बैंगन जैसी फसलों में रोज कीटों की निगरानी करें। फरवरी में बुवाई की गई फसले जैसे भिन्डी, बरबटी, ग्वारफली इत्यादि में गुडाई कर सिंचाई करें।

 

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