आंदोलन में शहीद किसानों की स्मारक के लिए छत्तीसगढ़ के सोनाखान से मिट्टी यात्रा 03 अप्रैल से शुरू


 महासमुंद के तमोरा से लिया मिट्टी 04 अप्रैल को दल्ली राजहरा और कंडेल से लेंगे मिट्टी

 राजिम संवाददाता नेहरू साहू की रिपोर्ट
9407900242

कॉरपोरेट परस्त तथा किसान, कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी तीनों कानून को रद्द करने, एमएसपी की गारण्टी कानून बनाने, बिजली संशोधन बिल 2020 को वापस लेने और प्रदूषण नियंत्रण कानून में किसान विरोधी कॉलम को हटाने की मांग को लेकर दिल्ली सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन को चार महीना से ज्यादा हो चुका है और इस दौरान सवा तीन सौ के करीब किसान अब तक अपनी प्राणों की कुर्बानी दे चुके हैं। दिल्ली सीमाओं पर जैसे सिंघु, टीकरी, गाजीपुर, शाहजहांपुर, पलवल में शहीद किसानों की स्मारक बनाने के लिए देश भर में मिट्टी सत्याग्रह के माध्यम से मिट्टी एकत्रित किया जा रहा है जो 06 अप्रैल को सिंघु बार्डर पहुचेंगे। शहीद किसानों की स्मारक बनाने छत्तीसगढ़ के कोने कोने से मिट्टी एकत्रित किये जा रहे हैं।

अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव और छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही ने  सोनाखान से मिट्टी लेने के अवसर पर कहा कि 1857 में छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्रामी वीर नारायण सिंह के जन्म स्थली है। शहीद वीर नारायण सिंह ने अकाल के समय जमीदारों के गोदामों में बंद अनाज को मुक्त कर गरीब जनता के मध्य वितरण किया गया। यह भोजन के लिए अधिकार का संघर्ष था। आज जारी किसान आंदोलन केंद्र के मोदी सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ किसान, कृषि और आम उपभोक्ताओं के लिए भोजन सुरक्षा का संघर्ष है।

 तमोरा से मिट्टी लेने के अवसर पर छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य और महासमुंद जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर ने कहा कि  1930 में अंग्रेजों के विरुद्ध जंगल सत्याग्रह हुआ। जिसका असर उस समय महासमुंद के तमोरा ग्राम में 8 सितम्बर 1930 को आमसभा के साथ हुआ जब अंग्रेज कर्मचारी द्वारा जंगल मे पशु चराने पर पाबंदी लगा दिया गया था। ग्रामीणों के इस संघर्ष ने गांधी जी को तमोरा आने के लिए प्रेरित किया।

  04 अप्रैल को दिन के 12 बजे दल्ली राजहरा शहीद स्थल से मिट्टी लेंगे जहां पर सरकार की नवउदारवादी नीतियों की विरोध करने वाले मजदूर पुलिस दमन का शिकार हुआ उसी दिन शाम 04 बजे धमतरी जिला के कंडेल से मिट्टी लेंगे जहां किसानों ने 1920 में नहर सत्याग्रह किया था।  05 अप्रैल को डॉ राजाराम त्रिपाठी के नेतृत्व में जगदलपुर के साथी 1910 में बस्तर में हुए भूमकाल आंदोलन के शहीदी स्थल से मिट्टी लेकर आएंगे तथा  अधिवक्ता शत्रुघन साहू के नेतृत्व में नगरी सिहावा व अन्य जगहों से लाए गए मिट्टी को 5 अप्रैल को दिन के 12 बजे रायपुर रेलवे स्टेशन पर तेजराम विद्रोही,  मूलचंद साहू, रतन गोंडाने, रेखा गोंडाने  को सौपेंगे जिनके नेतृत्व में यह मिट्टी  06 अप्रैल को सिंघु बार्डर पहुँचेगी। वहीं बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर श्याम मूरत कौशिक के नेतृत्व में मिट्टी सौंपी जाएगी।

मिट्टी सत्याग्रह कार्यक्रम में शहीद वीर नारायण सिंह के वंशज राजेन्द्र दिवान, छोटे लाल, पुनिराम यादव, कौशिल्या चौहान, मूलचंद साहू, ललित कुमार, बलीराम साहू, अवधराम साहू, अशोक साहू, घनश्याम दिवान, मनहरण धीवर, मन्नू लाल चौहान, गिरीश सेन, नर्भय सिन्हा, गैंदसिंह दिवान, प्रकाश चौहान, आकाश चौहान आदि उपस्थित रहे।

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