पटरी पर लौटती जिंदगी अप्रैल-मई में 64 हजार 800 से ज्यादा परिवारों को

आज मनरेगा में 1 लाख 16 हजार से ज्यादा श्रमिकों ने किया काम

अप्रैल-मई में 64 हजार 800 से ज्यादा परिवारों को 16.21 लाख मानव दिवस का मिला रोजगार

(छत्तीसगढ़ सेवा) वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव एवं लॉकडाउन के बीच श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती थी। जिले में कोरोना संक्रमण की कमी आने पर जिला प्रशासन द्वारा लाॅकडाउन को कुछ छूट के साथ शिथिल किया है। इससे रोजी-रोजगारी और व्यापार से लेकर दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिकों को भी बहुत राहत मिली है। 

 

जिले के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के तहत् चल रहे कार्य में लोग आने लगे है। आज के दिन जिले में 1 लाख 16 हजार 59 श्रमिकों ने मनरेगा के तहत् चल रहे विभिन्न कार्यों में काम किया। जिले के सभी ब्लाॅकों में मनरेगा का काम चल रहा है। जिले में कोविड-19 के संबंध में जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए एवं आवश्यक सुरक्षात्मक उपायों के साथ मनरेगा के कार्य सुचारू रूप से जारी रखने को कहा है।

 
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश छिकारा ने बताया कि जिले में आज 1 लाख 16 हजार 59 श्रमिकों को मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराया गया है। जिसमें जनपद पंचायत महासमुन्द में 24,826, बागबाहरा में 27,050, पिथौरा में 20,827, बसना में 20,861 एवं सरायपाली में 22,495 श्रमिक कार्य कर रहे हैं। 

 माह अप्रैल-मई दो माह में जिले के 64,858 परिवार के 1 लाख 25 हजार 702 सदस्यों को 16.21 लाख दिवस का रोजगार मुहैया कराया गया। यह दिए गए लक्ष्य का 77 प्रतिशत् से अधिक है। अधिकारियों ने बताया कि इन दो माहों में 28 करोड़ 10 लाख पारिश्रमिक का भुगतान होना है। इसमें से अधिकांश मजदूरों का भुगतान हो चुका है। कुछ श्रमिकों को भुगतान माह के अंत तक हो जाएगा।

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