महासमुन्द जिला अपनी सांस्कृतिक इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र ‘सोमवंशीय सम्राट’ द्वारा शासित ‘दक्षिण कोशल’ की राजधानी थी, यह सीखने का केंद्र भी हैं। यहाँ बड़ी संख्या में मंदिर हैं,जो अपने प्राकृतिक और सौंदर्य के कारण हमेशा आगंतुकों को आकर्षित करते हैं। यहाँ के मेले/त्यौहार लोगों के जीवन का हिस्सा बन गए हैं।। दक्षिण कोशल यानी,वर्तमान छत्तीसगढ़ के सिरपुर की स्थिति सभी अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों के शीर्ष पर है। सिरपुर, पवित्र महानदी नदी के तट पर स्थित है,यह पूरी तरह से सांस्कृतिक और स्थापत्य कला का विलय है।
महासमुंद अविभाजित मध्य प्रदेश 6 जुलाई 1998 को जिला बना। कलेक्टर श्री डोमन सिंह ने आज जारी संदेश में ज़िला प्रशासन की और से ज़िले की जनता को बधाई और शुभकामनाएँ दी । इस मौक़े पर उन्होंने महासमुंद और पूरे छत्तीसगढ़ की सुख समृद्धि की कामना की । महासमुंद ज़िला 23 वर्ष का हो चुका है। इस दौरान ज़िले में विकास का पहिया घूम रहा है। सिंचाई के साधन, शिक्षा, चिकित्सा, विद्युत, अधोसंरचना निर्माण, पशु, वानिकी, ग्रामीण उत्थान हर क्षेत्र में काम हुए । अब ज़िले में मेडिकल कालेज, कोरोना सैंपलों की RT-PCR जांच के लिए वायरोलॉजी लैब भी खुल गयी है। हालांकि आज भी कई सुविधाओं की जरूरत बनी हुई है, बावजूद इसके विकास के पथ पर गतिमान महासमुंद जिला छत्तीसगढ़ प्रदेश में अपनी नैसर्गिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों बनाए हुए है । ज़िले में बेहतर प्रशासन, योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है । कृषि कॉलेज, पॉलीटेक्निक, मेडिकल कॉलेज, रेल सुविधाओं के विकास, ओवरब्रिज, अधोसरंचना का विकास हुआ ।
जिले के 5 तहसील के अंतर्गत आते है, ज़िले में 551 ग्राम पंचायत और 1153 गांव आते है । इन तहसीलों या ब्लॉक में सबसे ज्यादा गांव सरायपाली ब्लॉक में है, और सबसे कम ग्राम महासमुंद ब्लॉक में है । प्रशासन द्वारा ज़िले में वैश्विक महामारी कोरोना की पहली और दूसरी लहर की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए सभी ज़रूर्री कदम उठाए गए ।जिसका परिणाम में बीते रविवार 4 जुलाई2021 को एक भी कोरोना जाँच पॉज़िटिव नही निकली । ज़िले के सभी पात्र हितग्राहियों को शासन की हितग्राही मूलक योजना का लाभ दिलाया जा रहा है ।
पर्यटन स्थल के लिए सिरपुर, चांदी माता मंदिर, खाल्लरी, बारनवापारा अभ्यारण्य, ग्राम बोरिद स्थित झरना, छेरी गोधनी की गुफा । सिरपुर छत्तीसगढ़ राज्य के महासमुंद जिले का एक गांव है, रायपुर से 78 किमी दूर और महासमुंद शहर से 35 किमी दूर है। यहां लक्ष्मणेश्वर मंदिर (लक्षमण मंदिर ), सुरंग टीला तथा तीवर देव विहार जैसी पुरातात्विक पर्यटन स्थल स्थित है।सुरंग टीला मंदिर यह महासमुंद जिले में सिरपुर शहर में स्थित है। महानदी नदी के किनारे पर स्थित यह ऐतिहासिक शहर अपने प्राचीन मंदिरों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित पुरातात्विक उत्खनन के लिए प्रख्यात है। महासमुन्द से 40 किमी दक्षिण की ओर विकासखण्ड बागबाहरा में घुंचापाली गांव स्थित चंडी मंदिर घुंचापाली: है।खल्लारी माता का मंदिर: महासमुन्द से 25 किमी दक्षिण की ओर खल्लारी गांव की पहाड़ी के शीर्ष पर खल्लारी माता का मंदिर स्थित है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोपवे का भी निर्माण किया जाएगा। शासन ने अनुमति दे दी है ।

