विशेष लेख : गोधन न्याय से साकार हो रहा स्वावलंबी गांव का सपना
अगस्त 06, 2021
न
सिर्फ कीमती हो
चला है अपितु
गोबर को छूने
वाले, गोबर को
उठाने वाले लोग
गोबर से पैसे
बना रहे हैं
और अपने कच्चे
मकान को पक्का
कर रहे, तो
कोई मोटरसाइकिल खरीद
रहा। बहुत से
लोग है गोबर
बेचकर अपने बच्चों
को अच्छी शिक्षा
से जोड़ रहे
हैं और अपनी
अनेक जरूरतों को
भी आसानी से
पूरा कर रहे
हैं। गोबर से
होने वाली आमदनी
ग्रामीणों और बेरोजगारों
की जीवनरेखा बदल
रही है और
गढ़बो नवा छत्तीसगढ़
की संकल्पना को
साकार कर ग्रामीण
अर्थव्यवस्था को मजबूत
बनाकर स्वावलंबन की
राह को भी
आसान कर रही
है।
गोधन
न्याय योजना से
जुड़कर आमदनी बढ़ाने
वाले परिवारों में
अब खुशहाली ही
खुशहाली है। पशुपालन
को घाटे का
सौदा मानकर चलने
वाले भी अब
गोबर बेचकर लाखों
का मुनाफा कमाने
लगे हैं। इस
योजना से जुड़कर
स्व सहायता समूह
की महिलाओं ने
भी आत्मनिर्भर बनने
के साथ तरक्की
की राह में
कदम आगे बढ़ाया
है। सरगुजा से
लेकर बस्तर तक
गोधन न्याय योजना
से आमदनी अर्जित
करने वालों की
संख्या लगातार बढ़ रही
है। कोई गोबर
बेचकर तो कोई
गोबर खरीदकर अपनी
भाग्यरेखा और लाइफस्टाइल
बदल रहा है।
बस्तर जिले में
बकावण्ड ब्लॉक के ग्राम
मंगनार की स्व
सहायता समूह की
महिलाएं गोबर से
खाद के अलावा
गमला, दीया भी
बना रही है। देवांशी
समूह की महिलाएं
सामूहिक बाड़ी के
माध्यम से सब्जी
उत्पादन से आमदनी
भी अर्जित कर
रही।
अब
वे खेतों में
ट्रैक्टर का इस्तेमाल
कर अधिक आमदनी
अर्जित कर पाएंगे।
लॉक डाउन में
मुफलिसी से जूझ
रहे अम्बिकापुर निवासी
मोहम्मद खान के
लिए गोधन न्याय
योजना संकटमोचक साबित
हुई। मोहम्मद खान
ने बताया कि
वह ऑटो चलाने
का काम करते
हैं। कोविड-19
की वजह से
जब राज्य में
लॉक डाउन लगा
तो ऑटो परिचालन
बन्द हो गया।
इस बीच उनकी
10 मवेशियाँ बहुत मददगार
साबित हुईं। वह
गोबर बेचकर किसी
तरह परिवार का
भरणपोषण कर पाए।
कोरिया के शिवचरण
ने बताया कि
गोबर बिक्री से
उन्होंने दो बैल
और क़िस्त में
मोटर सायकिल खरीदा
है। बलौदाबाजार जिले
के चरवाहा गंगाराम
ने बताया कि
अब तक 2 लाख
रुपए से अधिक
राशि प्राप्त हो
चुकी है। इस
राशि को उन्होंने
अपने बच्चे को
पढ़ाने और मकान
बनवाने के लिए
उपयोग किया है।
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