महापरीक्षा अभियान में 2 लाख से अधिक शिक्षार्थी हुए शामिल : नन्हें बच्चे के साथ माताओं ने भी दी परीक्षा

 

महापरीक्षा अभियान में 2 लाख से अधिक शिक्षार्थी हुए शामिल : नन्हें बच्चे के साथ माताओं ने भी दी परीक्षा

पढ़ना लिखना अभियान अन्तर्गत प्रौढ़ शिक्षार्थियों के आकलन के लिए राज्यव्यापी महापरीक्षा अभियान में प्रदेश के 2 लाख से अधिक शिक्षार्थियों ने परीक्षा दी। बुनियादी साक्षरता परीक्षा प्रदेश के 28 जिलों के चिन्हांकित 121 विकासखंड और 105 नगरीय निकायों के ग्राम पंचायत एवं वार्ड में महापरीक्षा अभियान का आयोजन किया गया। परीक्षा की उल्लेखनीय बात यह रही कि कहीं कई महिलाओं ने नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ, कहीं सास-बहू ने, कहीं बुजुर्ग एवं दिव्यांग ने परीक्षा दी। कोरबा जिले में पिता, पुत्र और पुत्रवधू ने एक साथ परीक्षा दी तो सेन्ट्रल जेल सरगुजा, जिला जेल कोरिया में कैदियों ने भी परीक्षा दी।


    राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण एवं राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के समन्वित पहल से शिक्षार्थी आंकलन के लिए आयोजित राज्यव्यापी महापरीक्षा अभियान प्रदेश के 28 जिलों के परीक्षा केन्द्रों में किया गया। परीक्षा में प्रदेश के 15 वर्ष से अधिक उम्र समूह के असाक्षर सुविधानुसार निर्धारित समय सुबह 10 से 5 के भीतर परीक्षा में सम्मिलित हुए।  शिक्षार्थी को प्रश्न पत्र हल करने के लिए 3 घंटे का समय दिया गया।


महापरीक्षा के पश्चात् बुनियादी साक्षरता परीक्षा की मूल्यांकन रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सी जी स्कूल डॉट इन पोर्टल में अपलोड़ कराई जाएगी। ताकि शिक्षार्थियों को राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण एवं राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान का प्रमाण पत्र दिया जा सके। राज्य सरकार द्वारा स्वयंसेवी शिक्षकों और शिक्षार्थियों को पृथक से प्रमाण पत्र दिया जाएगा।


महापरीक्षा अभियान के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह और राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के संचालक एवं सदस्य सचिव डी. राहुल वेंकट द्वारा जिलों के कलेक्टर को अर्द्धशासकीय पत्र जारी कर शिक्षार्थी आंकलन के सफल क्रियान्वयन के लिए निर्देश जारी किए थे।


मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और स्कूल शिक्षामंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने प्रौढ़ शिक्षार्थियों से परीक्षा में शामिल होने की अपील की थी। महापरीक्षा अभियान को सफल बनाने के लिए जिलों में नारा लेखन, अपील, बैनर, पाम्पलेट तथा शिक्षार्थियों के घर-घर में संपर्क कर आमंत्रण दिया गया और महापरीक्षा अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया गया। राज्य, जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई।


राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के संचालक एवं सदस्य सचिव के निर्देशानुसार महापरीक्षा अभियान के नोडल अधिकारी एवं सहायक संचालक श्री प्रशांत कुमार पाण्डेय, सहायक संचालक श्री दिनेश कुमार टांक, परियोजना सलाहकार, पढ़ना-लिखना अभियान श्रीमती निधि अग्रवाल एवं सुश्री नेहा शुक्ला द्वारा जिलों की मॉनिटरिंग की गई।


इच्छा शक्ति की जीत
    कांकेर जिले के नवागांव निवासी श्री छन्नूराम मरकाम ने अपनी दिव्यांगता को नजरअंदाज कर साक्षरता केन्द्र में पढ़ाई की और मनोयोग से अक्षर ज्ञान, अंक ज्ञान एवं लिखना सीखा। उन्होंने महापरीक्षा अभियान में शामिल होकर परीक्षा दी। उनकी प्रेरणा के सूत्रधार बन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इच्छापुर के छात्र-छात्राएं एवं संस्था प्रमुख ने श्री छन्नूराम का उत्साह बढ़ाया।

पति-पत्नी के साथ-साथ बहू भी शामिल हुई परीक्षा में

    पति-पत्नी का साथ यूं तो जीवन भर का होता है, पर साक्षरता में भी पति-पत्नी ने जीवनभर जैसा साथ निभाया। शिक्षा, साक्षरता के लिए श्री श्याम लाल बंजारे और श्रीमती शिवकुमारी बंजारे ने साक्षरता केन्द्र में साथ-साथ पढ़कर महापरीक्षा में साथ-साथ शमिल हुए। बिलासपुर जिले के विकासखंड मस्तूरी के लिमतरा परीक्षा केन्द्र में पति-पत्नी के साथ उनकी दो बहूओं ने भी परीक्षा दी। इस परिवार ने पढ़ना-लिखना अभियान में साक्षरता की ओर कदम बढ़ाया, जो एक मिसाल है।


70 वर्षीय कनक यादव भी शामिल हुए परीक्षा में

ये कहानी है दुर्ग के ग्राम नंदकटठी के रहने वाले 70 वर्ष के श्री कनक यादव की जो पढ़े-लिखे नही थे। जब ग्राम नंदकट्ठी में पढ़ना-लिखना अभियान की शुरुआत हुई तब स्वयंसेवी शिक्षक दीपाली निषाद उनके घर पहुंची। श्री कनक यादव ने साफ मना किया कि इतनी उम्र में मैं पढ़ाई करके क्या करुंगा, लेकिन स्वयंसेवी शिक्षक ने पढ़ने के लिए प्रेरित किया। वे पढ़ने के लिए आगे आये और साक्षरता केन्द्र में सबसे पहले पहुंच जाते थे और वहां पढ़ने की कोशिश करते थे। उन्होंने पढ़़ने के साथ-साथ लिखना भी सीख लिया और अब हस्ताक्षर कर लेतें हैं। कुछ पूछो तो वे बताते हैं और वह अपने पुराने अनुभवों को बाकी असाक्षर से साझा करते हैं। उन्होंने बताया कि वे मजदूरी करते हैं लेेकिन इतनी अधिक उम्र के साथ उसकी पढने की भी ललक जागृत हुई। वे अपने दोस्त को भी पढ़ना-लिखना अभियान के बारे में बताते हैं। आखरझांपी पुस्तक को भी बड़ी हिफाजत से रखते हैं, वहीं सभी को बताते हैं कि यह मेरी पुस्तक है और मै शाम को पढ़ने जाता हूं। परीक्षा में वे पहले आये और पूरे समय तक पेपर को बनाते रहे। वह आज अंगूठा लगाने की जगह हस्ताक्षर कर लेते हैं।

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