महासमुंद : विकसित कृषि संकल्प अभियान

 शिविर एवं किसान रथ के माध्यम से किसानों को किया जा रहा प्रोत्साहित एवं जागरूक

विभागीय योजनाओं, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं आधुनिक कृषि की दी जा रही जानकारी  

संचालनालय कृषि रायपुर से प्राप्त निर्देश के परिपालन में जिले में विकसित कृषि संकल्प अभियान का आयोजन 20 मई तक किया जा रहा है। इसी कड़ी में महासमुंद जिले में कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा सभी विकासखण्डों में 24-24 पंचायतों का चिन्हाकन कर शिविर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

उप संचालक कृषि श्री एफ.आर. कश्यप ने बताया कि शिविर में कृषि विभाग एवं अन्य समवर्गीय विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर एवं किसान रथ के माध्यम से विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। शिविर हेतु ऐसे ग्रामों का चयन किया गया है जहां पर सुशासन तिहार शिविरों का भी आयोजन किया जा रहा है, 11 मई को विकासखण्ड महासमुंद के ग्राम अछोला एवं नांदगाव में विकसित कृषि संकल्प अभियान शिविर आयोजित किया गया। ग्राम अछोला में सुशासन शिविर एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान के आयोजन में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहें एवं नांदगाव में भी किसानों के मध्य विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर शिविर का आयोजन किया गया।

इसी तरह विकासखण्ड बागबाहरा के ग्राम पतेरापाली, कन्हारपुरी एवं विकासखण्ड पिथौरा के बरेकेल खुर्द व डूमरपाली, विकासखण्ड बसना के ग्राम तिलाईदादर एवं कुसमुर तथा सरायपाली के जंगलबेड़ा एवं बलौदा में विकसित कृषि संकल्प अभियान का आयोजन किया गया। जिसमें सभी शिविरों में लगभग 1680 किसानों की उपस्थिति रही। शिविर में उपस्थित किसानों को विभागीय योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड में फसलवार अनुशंसित मात्रा अनुसार संतुलित उर्वरक के उपयोग के लिए किसानों को जागरूक एवं प्रोत्साहित किया गया एवं किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग प्रोत्साहन हेतु वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर ई-उर्वरक (टोकन प्रणाली) आधारित उर्वरक वितरण व्यवस्था के बारे में विस्तार से बताया गया। इसके अलावा डी.ए.पी. के विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे - 12ः32ः16, 20ः20ः13 एवं एसएसपी के उपयोग के संबंध में कृषकों को बताया गया। साथ ही बताया गया कि हरी खाद, जैव उर्वरक, नील हरित काई, केंचुआ खाद आदि के उपयोग से भूमि की दशा में सुधार और  उत्पादकता में वृद्धि होती है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना अंतर्गत छुटे हुए कृषकों का फार्मर आई डी स्थल में ही बनाया गया एवं नवीन कृषकों का केसीसी भी शिविर स्थल में बनाकर वितरण किया गया।

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