छात्रावास, आश्रमों के सुचारू संचालन हेतु जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न
महासमुन्द 06 नवम्बर 2019/जिले में आदिवासी विभाग द्वारा संचालित विभिन्न आश्रम-छात्रावासों के सुचारू संचालन के लिए गठित जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक आज यहां कलेक्टोरेट के सभा कक्ष में कलेक्टर श्री सुनील कुमार जैन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस दौरान सांसद श्री चुन्नीलाल साहू विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक में आश्रम छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने तथा व्यवस्थाओं को सुधारने पर विशेष जोर दिया गया और विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सांसद श्री चुन्नीलाल साहू ने कहा कि आश्रम एवं छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को स्वास्थ्यवर्धक एवं पोषण युक्त भोजन के साथ-साथ मौसमी सब्जियों को भोजन में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसके लिए सभी आश्रमों में किचन-गार्डन बनाने और उसको बढ़ावा देने के साथ-साथ साग-सब्जी उगाने पर जोर दिया गया। बताया गया कि जिले में संचालित अधिकांश आश्रम एवं छात्रावासों में उपलब्ध स्थानों के अनुरूप किचन-गार्डन की व्यवस्था की गई है। सासंद श्री साहू ने कहा कि आश्रम-छात्रावास के छात्रों को खेलने के लिए पर्याप्त खेल सामग्री के साथ विशेष रूप से इनडोर गेम्स जिसमें शतरंज, कैरम, बैडमिंटन आदि शामिल है, उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आश्रम-छात्रावासों में बाहरी बच्चों का प्रवेश नही होना चाहिए, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
कलेक्टर श्री जैन ने कहा कि आश्रम-छात्रावासों के निरीक्षण के लिए नोडल अधिकारियां की नियुक्ति की गई है, जो समय-समय पर इनका निरीक्षण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करते है। उन्होंने कहा कि इन प्रतिवेदनों में उल्लेखित कमियों को दूर करने की कार्रवाई करने के साथ उसके लिए उपाय किए जाए। इसके लिए निगरानी पंजी संधारण करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि छात्रों को प्रतिदिन नाश्ता और भोजन में दिए जाने वाले सामग्री का मीनू बनाया जाए और उसी के अनुरूप छात्रों को भोजन उपलब्ध कराया जाए। बैठक में यह बताए जाने पर कि कई आश्रम-छात्रावासों में गर्मी के दिनों में बोर में पानी की कमी होने से पेयजल की समस्या होती है, इसके लिए वाटर रिचार्जिंग की व्यवस्था का भी सुझाव दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि आश्रम-छात्रावासों में छात्रों के लिए मच्छरदानी, पलंग, गद्दा, चादर इत्यादि पर्याप्त संख्या में होनी चाहिए। जिन आश्रम-छात्रावासों में आवश्यक सामग्रियों की कमियों को वहां की सूची मंगा लेवें, ताकि उसकी समय पर व्यवस्था की जा सके। उन्होंने कहा कि छात्रों में व्यक्तिगत साफ-सफाई, स्वच्छता के साथ हॉस्टल की साफ-सफाई और व्यवस्था सुनिश्चित करें।
बैठक में सहायक आयुक्त आदिवासी श्री एन.आर.देवांगन ने बताया कि जिले में कुल 113 आश्रम-छात्रावास संचालित है। उन्होंने बताया कि जिले के विकासखण्ड महासमुन्द में 23 आश्रम-छात्रावास, बागबाहरा में 18, पिथौरा में 23, बसना में 24 एवं सरायपाली में 25 आश्रम-छात्रावास संचालित है। इनमें से पोस्ट-मेट्रिक 11 छात्रावास, पी्र-मेट्रिक 78 छात्रावास एवं 24 आश्रम संचालित है। उन्होंने बैठक में आश्रम-छात्रावास से संबंधित स्वीकृत पदों, छात्रावास सीट, उपस्थिति एवं भवन सहित अन्य के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। आश्रम-छात्रावास के बच्चों के बीच विकासखण्ड स्तरीय खेल प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी और सांस्कृतिक कार्यकमों का आयोजन दिसम्बर माह में किया जाएगा। विकासखण्ड स्तरीय प्रतिस्पर्धा में चयनित छात्र जिला स्तर पर आयोजित होने वाले प्रतियोगिता में भाग लेंगे। इस अवसर पर श्री संदीप दीवान, जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.पी.वारे, खाद्य अधिकारी श्री अजय यादव सहित आश्रम-छात्रावासों के समिति सदस्य अधीक्षक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री जैन ने कहा कि आश्रम-छात्रावासों के निरीक्षण के लिए नोडल अधिकारियां की नियुक्ति की गई है, जो समय-समय पर इनका निरीक्षण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करते है। उन्होंने कहा कि इन प्रतिवेदनों में उल्लेखित कमियों को दूर करने की कार्रवाई करने के साथ उसके लिए उपाय किए जाए। इसके लिए निगरानी पंजी संधारण करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि छात्रों को प्रतिदिन नाश्ता और भोजन में दिए जाने वाले सामग्री का मीनू बनाया जाए और उसी के अनुरूप छात्रों को भोजन उपलब्ध कराया जाए। बैठक में यह बताए जाने पर कि कई आश्रम-छात्रावासों में गर्मी के दिनों में बोर में पानी की कमी होने से पेयजल की समस्या होती है, इसके लिए वाटर रिचार्जिंग की व्यवस्था का भी सुझाव दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि आश्रम-छात्रावासों में छात्रों के लिए मच्छरदानी, पलंग, गद्दा, चादर इत्यादि पर्याप्त संख्या में होनी चाहिए। जिन आश्रम-छात्रावासों में आवश्यक सामग्रियों की कमियों को वहां की सूची मंगा लेवें, ताकि उसकी समय पर व्यवस्था की जा सके। उन्होंने कहा कि छात्रों में व्यक्तिगत साफ-सफाई, स्वच्छता के साथ हॉस्टल की साफ-सफाई और व्यवस्था सुनिश्चित करें।
आश्रम-छात्रावासों में बच्चों का समय-समय पर होगा स्वास्थ्य परीक्षण
बैठक में कलेक्टर श्री जैन ने जिला मुख्य एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि शासन के निर्देशानुसार आश्रम-छात्रावासों में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण समय-समय पर करना सुनिश्चित करे, इसके लिए नामजद चिकित्सक नियुक्त करे और उन चिकित्सकों का नाम एवं सम्पर्क नम्बर आश्रम-छात्रावास के नोटिस बोर्ड पर अंकित कराएं। ये चिकित्सक माह में कम-से-कम एक बार बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जहां आश्रम-छात्रावास के भवन निर्माणाधीन है, उसे तत्काल पूरा करने के लिए कार्रवाई करें। इसके अलावा निगरानी समिति में प्रत्येक विकासखण्ड के आश्रम-छात्रावास अधीक्षक जो दूरस्थ अंचल के है, उन्हें सदस्य के रूप में शामिल किया जाए।बैठक में सहायक आयुक्त आदिवासी श्री एन.आर.देवांगन ने बताया कि जिले में कुल 113 आश्रम-छात्रावास संचालित है। उन्होंने बताया कि जिले के विकासखण्ड महासमुन्द में 23 आश्रम-छात्रावास, बागबाहरा में 18, पिथौरा में 23, बसना में 24 एवं सरायपाली में 25 आश्रम-छात्रावास संचालित है। इनमें से पोस्ट-मेट्रिक 11 छात्रावास, पी्र-मेट्रिक 78 छात्रावास एवं 24 आश्रम संचालित है। उन्होंने बैठक में आश्रम-छात्रावास से संबंधित स्वीकृत पदों, छात्रावास सीट, उपस्थिति एवं भवन सहित अन्य के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। आश्रम-छात्रावास के बच्चों के बीच विकासखण्ड स्तरीय खेल प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी और सांस्कृतिक कार्यकमों का आयोजन दिसम्बर माह में किया जाएगा। विकासखण्ड स्तरीय प्रतिस्पर्धा में चयनित छात्र जिला स्तर पर आयोजित होने वाले प्रतियोगिता में भाग लेंगे। इस अवसर पर श्री संदीप दीवान, जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.पी.वारे, खाद्य अधिकारी श्री अजय यादव सहित आश्रम-छात्रावासों के समिति सदस्य अधीक्षक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

