पुस्तक समीक्षा पर आधारित व्याकरण शाला का काव्य संसद में हुआ आयोजन

रायगढ़- काव्य संसद के पटल पर वर्चुअल व्याकरण शाला का आयोजन हुआ। इस व्याकरण शाला में पुस्तक समीक्षा की उपयोगिता, समीक्षा के  अभिप्राय एवं समीक्षा और आलोचना में अंतर के विषयों पर आधारित व्याख्यान दिये गए। काव्य संसद प्रमुख पुखराज प्राज ने कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए कहा कि, किसी पुस्तक की उपयोगिता और उसकी प्रासंगिकता के संदर्भ में जानकारी पाठकों तक सटीकता से पहुचाने के लिए पुस्तक की समीक्षा होना अति आवश्यक है। समीक्षक को पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर अपने विचार रखने चाहिए। 


 इसके पश्चात क्रमशः रायगढ़ से युवा कलमकार गुलशन खम्हारी ने समूह में पुस्तक समीक्षा पर अपने विचार रखे। रायगढ़ से युवा कवयित्री पुष्पा पटनायक के द्वारा पुस्तक समीक्षा और आलोचना के मध्य अंतर के संदर्भ से जानकारी समूह के बीच रखी गई। कोरबा से कवयित्री गोमती सिंह के द्वारा पुस्तक समीक्षा के विशेषताओं पर जानकारियाँ दी गई। कांकेर से कवयित्री नलिनी बाजपेयी के द्वारा पुस्तक समीक्षा के प्रकार के संदर्भ में व्याख्यान दिया। दुर्ग से कवयित्री अनुरमा शुक्ल के द्वारा पुस्तक के प्रासंगिकता के संदर्भ में व्याख्यान दिया गया। अंतिम वक्ता के रूप में काव्य संसद प्रमुख पुखराज प्राज ने एक अच्छे समीक्षक गुण एवं पुस्तक समीक्षा किस प्रकार करें इस संदर्भ में उदाहरण सहित व्याख्यान दिया गया। 


 इसके पश्चात अगली कड़ी में प्रश्नकाल का आयोजन हुआ ।  जिसमें पुस्तक समीक्षा पर आधारित प्रश्न समूह के सदस्यों द्वारा पूछे गए, जिनके उत्तर काव्य संसद प्रमुख द्वारा दिया गया। काव्य संसद के उपाध्यक्ष डिग्री लाल जगत जी ने जानकारी देते हुए बताया की आगामी काव्य पितृमोक्ष अमावस्या के अवसर पर, सामाजिक कार्यक्रम के स्वरूप में प्रत्येक साहित्यकार के द्वारा परिवार-वृक्ष के का निर्माण किया जायेगा। उक्त कार्यक्रम का आयोजन जल्द किया जायेगा। 

इस कार्यक्रम में डिग्री लाल जगत निर्भीक, सुन्दर लाल डडसेना मधुर, नलिनी बाजपेयी, गोमती सिंह, विनोद कुमार जोगी, अनुरमा शुक्ल, संतराम कुम्हार, अजय पटनायक, पुष्पा पटनायक, प्रवीण ठाकुर, मीरा आर्ची चौहान, गुलशन खम्हारी, टिकेश्वर सिदार दीपक, लीलाधर कुम्हार, नागेश कश्यप, पदमा साहू, उर्मिला सिदार, माधवी गणवीर, गुलाब सिंह, प्रिया गुप्ता, शैलेंद्र चेलक,देवयानी शुक्ल, गिरधारी लाल चौहान सहित भारी संख्या में साहित्यकारों की ई-उपस्थिति रही।

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