रायपुर//नोवेल कोरोना वायरस कोविड-19 के संक्रमण से उत्पन्न आपात स्थिति में निजी विद्यालयों द्वारा लगातार किसी ना किसी तरह अभिभावकों से शुल्क वसूलने की हरक़त करते ही रहे हैं। कोरोना विषाणु के संक्रमण के कारण शिक्षा सत्र 2020 - 2021 में स्कूलों का संचालन हुआ ही नही लेकिन अब ज़िला कलेक्टर द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 में प्रदत्त शक्ति के तहत गत एक जून 2020 को स्कूल फीस में वृद्धि नहीं करने के शर्त पर शुल्क बकाया होने के आधार पर किसी विद्यार्थी को स्कूल से वंचित नहीं किए जाने अथवा तत्संबंध में दबाव नहीं बनाए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया था
प्रतीकात्मक छायाचित्र
अवगत होकि राज्य के उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा भी स्कूलों में केवल ट्यूशन फीस लेने एवं इसमें वृद्धि या संशोधन नहीं करने के संबंध में निर्देश जारी किया गया था। इसी के आड़ में अब निजी स्कूलों द्वारा शुल्क जमा करने विभिन्न तरीकों की दिखावटी व्यवस्था बनाई जा रही है।
- निजी स्कूलों द्वारा कभी ऑनलाइन कक्षा का बहाना तो कभी ऑनलाइन मासिक टेस्ट कराने के बदले अभिभावकों से शुल्क मांगा जा रहा है। स्वयं धमतरी के जिला शिक्षा अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की हैकि न्यायालय व प्रशासन के उक्त आदेशों के बाद भी निजी विद्यालयों के द्वारा पालकों पर फीस के संबंध में दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन निजी स्कूल संचालकों पर प्रशासन का तनिक भी ख़ौफ ना होना यह तय करता हैकि तमाम निर्देश सिर्फ़ दिखावटी ही हैं। युवासेना के राज्य सचिव अरुण पाण्डेय् ने राज्यभर के सभी अशासकीय शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों, प्राचार्यों को अंतिम बार चेतावनी जारी करते कहा है कि उनके द्वारा मनमानी फीस वसूली किए जाने के संबंध में यदि आगे कोई शिकायत प्राप्त होती है तो उसके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग के साथ ही उनके मान्यता समाप्त करने के लिए भी सरकार से प्रस्ताव किया जाएगा, आवश्यकता पड़ी तो राज्य भर में आंदोलन किया जावेगा और जिसके लिए स्कूल प्रबंधन स्वयं जिम्मेदार होंगे।


