शिक्षक दिवस के अवसर पर ई- प्रलेख उम्मीद का हुआ काव्य संसद के वर्चुअल पटल में विमोचन

राज्य भर के 65 साहित्यकारों की शिक्षक को समर्पित रचनाओं का संकलन है उम्मीद
रायगढ़- काव्य संसद, छत्तीसगढ़ साहित्यिक समूह के द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर ई-पुस्तक उम्मीद  राष्ट्रीय साझा काव्य संग्रह का विमोचन हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ वर्चुअल पटल में मां सरस्वती के छायाचित्र में माल्यार्पण एवं सरस्वती मां के वंदना से हुआ। इसके पश्चात काव्य संसद के उपाध्यक्ष डिग्री लाल जगत निर्भीक के द्वारा ई-पुस्तक के कवर पेज का अनावरण किया गया। श्री जगत जी ने बताया कि यह पुस्तक काव्य संसद के समस्त सदस्यों के साझा प्रयास का फल है जो एक काव्य कृति के रूप में हम सभी के बीच उपलब्ध है। साथ ही इस पुस्तक को जल्द ही अमेज़न और विभिन्न ई-बुक प्लेट्फ़ार्म में उपलब्ध कराया जायेगा। तत्पश्चात समूह में ई-कान्फ्रेंशिंग के जरिये जूड़े काव्य संसद प्रमुख पुखराज प्राज ने साझा संग्रह की ई-विमोचन कर इस कृति को समूह के सदस्यों के मध्य रखते हुए कहा कि यह प्रलेख गुरु को समर्पित है। इस प्रलेख में विशेषकर 65 कविताओं को संग्रह में सभी साहित्यकारों के शिक्षक की भूमिका, कार्य, कर्तव्य एवं समाज कल्याण के लिए किये जा रहे पहल, वर्तमान में शिक्षक के परिवेश एवं विविध दृष्टिकोण पर आधारित रचनाओं का संकलन हुआ है। 

शिक्षक को समर्पित यह किताब भावी पीढ़ी के लिए वर्तमान समय का एक धरोहर स्वरूप होगा। इस कार्यक्रम के दौरान, पटल पर क्रमशः सदस्यों ने वक्तव्य दिया। इस कड़ी में रायगढ़ से साहित्यकार रामचंद्र प्रधान ने कहा शिक्षक की भूमिका समाज में महत्वपूर्ण होता है। शिक्षकों को बच्चों में नव ज्ञान के सृजन के साथ समाज में शिष्टाचारी छात्रों का निर्माण करें। रायगढ़ से गुलशन खम्हारी ने कहा की मैं आज उन गुरुओं को याद कर रहा हूं जिनके कारण वर्तमान में हूँ। सभी गुरुजनों का आभारी हूँ। रायगढ़ से युवा कवयित्री ने गुरु को याद करते हुए संस्कृत में श्लोक पढ़े। पिथौरा से संतोष गुप्ता ने कहा शिक्षक विश्व का निर्माता है। कोरिया से कवयित्री तारा पांडेय ने काव्य संसद के प्रमुख द्वारा किये जा रहे व्याकरण शाला को स्मरण  करते हुए इस पटल के सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापित की। बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार ने सभी सदस्यों को शिक्षक दिवस की बधाई देते हुए काव्य संसद के कार्यक्रम की सराहना की। महासमुन्द से विनोद कुमार ने इस अवसर पर गुरु पर आधारित कविता प्रस्तुत किया।  राजनांदगांव से कवयित्री पद्मा साहू ने जीवन में शिक्षक की भूमिका के संदर्भ में अपना वक्तव्य रखा। इस दौरान कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से तारा पांडेय, रामप्रताप साहू, दूजराम साहू, सावित्री यादव, पुष्पा पटनायक, गिरधारी लाल चौहान, पद्मा साहू, माधवी गणवीर, रामचंद्र प्रधान, अनुरमा शुक्ला, डॉ ओमकार साहू, गोमती सिंह, नलिनी बाजपेयी, मीरा आर्ची चौहान, मोनालिसा बेहरा, संतराम कुम्हार, चेतन सिंह, गुलशन खम्हारी, प्रिया गुप्ता, लक्ष्मण प्रसाद साहू, विनोद कुमार, संतोष गुप्ता,शैलेन्द्र चेलक, कृष्ण कुमार ध्रुव सूर्यप्रकाश पाटिल, डिग्री लाल जगत सहित सैकड़ों की संख्या में सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन सह संस्थापक सुन्दर लाल डडसेना मधुर ने किया।
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कांकेर से कवयित्री मीरा आर्ची चौहान की पुस्तक का ई-विमोचन काव्य संसद के वरिष्ठ कवयित्री मीरा आर्ची चौहान के कविताओं के संग्रह की किताब अंशु का विमोचन शिक्षा दिवस के अवसर पर हुआ। मीरा आर्ची चौहान के द्वारा अंशु में सृजित विभिन्न कविताएं जीवन के विभिन्न अनुभवों का साझाकरण है। जिसमें शिक्षा, जीवन दर्शन, साहित्य, विवाह एवं विभिन्न पहलुओं को केन्द्रित करती रचनाओं का संकलन किया गया है। इस विमोचन के साथ- साथ कोण्डागांव से कवि स्वपन बोस की आगामी पुस्तक का पोस्टर जारी किया गया।
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100 रचनाएं पूरी करने वाले साहित्यकारों की सूची जारी काव्य संसद के पटल पर इस वर्ष में 100 रचनाएं सृजन करने वाले साहित्यकारों की सूची काव्य संसद प्रमुख पुखराज प्राज ने जारी करते हुए बताया कि कांकेर से नलिनी बाजपेयी, मीरा आर्ची चौहान, जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान, महासमुन्द से सुन्दर लाल डडसेना एवं विनोद कुमार जोगी को इस सूची में नामांकित किया गया है। जिनकी आगामी माह में प्रलेख प्रकाशित होंगे।
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राज्य के सभी जिलों से साहित्यकारों की रही उपस्थित, हुए सम्मानित काव्य संसद, छत्तीसगढ़ के द्वारा प्रकृति: साझा काव्य संकलन में सम्मिलित साहित्यकारों को सहभागिता प्रमाण पत्र-2020 की ई प्रति जारी कर सम्मानित किया गया।  डिग्री लाल जगत के द्वारा 59 साहित्यकारों को यह सम्मान पत्र प्रदान किये गए। सह संस्थापक सुन्दर लाल डडसेना ने बताया कि इस प्रलेख में राज्य के विभिन्न जिलों से साहित्यकारों के रचनाओं का संकलन किया गया है। इस कार्यक्रम के दौरान लगभग राज्य के समस्त जिलों से साहित्यकारों की ई-उपस्थिति रही।
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