लोकवाणी में ‘जनता की कहानी उनकी जुबानी’

रायपुर, 11 अक्टूबर 2020 एक नवम्बर, 2020 को छत्तीसगढ़ राज्य के गठन को 20 वर्ष पूरा होगा। नयी सरकार के पौने दो साल की अवधि में किए गए कार्यों पर भी अनेक श्रोताओं ने रेडियोवार्ता लोकवाणी में खुल कर अपने विचार रखे। इन श्रोताओं ने लोकवाणी के लिए अपने अनुभव रिकार्ड कराए थे। श्रोताओं ने योजनाओं की सराहना की और योजनाओं से जुड़ी अपनी कहानियां कह सुनाईं।

कर्जमाफी, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान
न्याय योजना से किसानों को मिला लाभ

दुर्ग जिले के चंदखुरी निवासी पुरैन चन्द्राकर ने लोकवाणी में बताया कि उनके संयुक्त परिवार में 11 एकड़ खेती की जमीन है, सरकार की योजना में उनका 1 लाख 5 हजार रूपए का कर्ज माफ हुआ। करीब 160 क्ंिवटल धान विक्रय करने पर लगभग साढ़े तीन लाख रुपए की राशि मिली। चंद्राकर ने कहा कि इस पैसे से मेरी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, भूमि सुधार किया, खेतों की फिनिशिंग की और जमीन भी ली, दो गाय भी ली। एक माह में 30 हजार रुपए का गोबर भी उन्होंने बेचा। दुर्ग के लेपरा गांव के जीवन प्रताप सिंह ने बताया कि ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ के तहत उन्हें 15 हजार रुपए मिले हैं, जिससे वे काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना के चलते काम बंद था, पूरे पैसे खत्म हो गए थे। ऐसे में हम लोगों के पास बहुत समस्या आ गई थी पैसे की। ऐसे समय में हमारे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने बहुत ही अच्छे समय में पैसे दिए दिए हैं। मैं उनको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ। क्योंकि किसान के पास पैसा नहीं रहेगा तो खेती कैसे करेगा और किसान तो केवल अपने लिए नहीं कमाता है पूरे देश के लिए कमाता है।


    सोलर लाईट लगने से गांवों के जनजीवन में आया बदलाव

बीजापुर के ग्राम पेद्दाकवाली के  श्रवण जाडी ने लोकवाणी में बताया कि हमारा गांव बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 90 कि.मी. की दूरी पर है, जो काफी अन्दरूनी एवं दूरस्थ क्षेत्र है। गांव में सरकार द्वारा सोलर होम लाइट लगाई गई है। जिससे गांव के लोग काफी खुश हैं। अब बच्चे रात में भी पढ़ाई कर सकते हैं। जंगल क्षेत्र होने के कारण रात को बाहर निकलना मुश्किल होता था। सांप, बिच्छू का डर रहता था। बिजली आने से अब रात में खाना बनाने, टी.वी. देखने एवं पंखे का उपयोग कर सकते हैं। मुख्यमंत्री जी इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

   
सुपोषण अभियान और ‘स्वर्गीय महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना’ के लिए श्रोताओं ने मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद

दंतेवाड़ा जिले के ग्राम चीतालूर की रहने वाली अनिता ठाकुर ने बताया कि मेरे समूह का नाम है माँ दन्तेश्वरी स्व-सहायता समूह है। हमारे जिले में मुख्यमंत्री सुपोषण योजना का शुभारंभ किया गया है और पहली बार स्वास्थ्य को महत्व दिया गया है। हमारे जिले में कुपोषण और एनीमिया को दूर करने के लिए सभी बच्चों एवं माताओं को पौष्टिक गरम भोजन दीदी लोगों के द्वारा बनाकर दिया जाता है, जिसमें उपयोग की जाने वाली सब्जी का उत्पादन भी दीदी लोगों के द्वारा बाड़ियों में किया जाता है। साथ ही सुपोषण योजना में अण्डे महिलाओं और बच्चों को दिए जाते हैं, वह भी जिले के ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। दंतेवाड़ा जिले के ग्राम बालू की सविता ठाकुर ने बताया कि वे ‘सीता स्व-सहायता सेवा समूह’ की सदस्य हैं। मुख्यमंत्री जी, आपकी सरकार ने जो वादा किया वह पूरा करके दिखाया है। पहले तेंदूपत्ता का मूल्य प्रति मानक बोरा 25 सौ रुपए मिलता था। आपकी सरकार के आने से अब प्रति मानक बोरा 4 हजार रू. मिल रहा है। ऐसे ही इमली इकट्ठा कर बाजार में बेचने पर प्रति किलो 20 से 22 रुपए मिलते थे। आज आपकी पहल के कारण 35 से 40 रू. प्रति किलो में बेच रहे हैं। इस वर्ष जिले में लगभग 3.50 करोड़ रुपए की इमली की खरीदी की गई है। सर, एक बात और बताएं कि उसी इमली का बीज निकालने से अब हमको दोबारा मुनाफा हो रहा है। बीज निकालने का 550 रू. प्रति क्विंटल लाभ मिल रहा है। आपको बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने इमली की रकम बढ़ाई और इमली बीज निकालने से हमें रोजगार भी मिला। सर, हमें किसी भी प्रकार की बीमा योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। आज आपके द्वारा ‘स्वर्गीय महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना’ लागू करके हमारे परिवार का ध्यान रखा गया। उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, जय जोहार। राज्य सरकार और जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में आमचो बस्तर के तहत हम बच्चों की शिक्षा के लिए नए-नए प्रयोग कर पाए हैं। आमचो बस्तर के तहत बस्तर जिला में काजू, हल्दी, कॉफ़ी में रोजगार से लोगों को आर्थिक उन्नति का अवसर मिला है। साथ ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोगों को अच्छी सुविधाएं मिल रही हैं और आधारभूत विकास कार्यों में भी लोगों को काम मिल रहा है।

सामुदायिक वन अधिकार मिलने पर गांव में शुरू हुई बकरी, मुर्गी पालन, बतख पालन, मछली पालन जैसी आयमूलक गतिविधियां

जिला उत्तर बस्तर, कांकेर, विकासखंड चारामा की ग्राम पंचायत खेरखेड़ा शिव तुमरेटी ने बताया कि ग्राम पंचायत खेरखेड़ा को 24 अगस्त 2019 को मुख्यमंत्री के कर-कमलों से वन अधिकार पत्र मिला है। सामुदायिक निस्तार पत्र सामुदायिक पट्टा 4 हजार 596 एकड़ का। उसमें हमने गौठान को जोड़कर काम करना चालू किए हैं, जिसमें बकरी, मुर्गी पालन, बतख पालन, मछली पालन और साथ-साथ कम्प्यूटर और सिलाई मशीन का अभी काम चालू है, जिसमें अपने कई बेरोजगार साथियों के समूह को हमने काम दे रखा है। दंतेवाड़ा जिले के ग्राम जमावड़ा निवासी संतराम भास्कर ने लोकवाणी के जरिए मुख्यमंत्री से कहा कि आदिवासियों के लिए वन अधिकार पत्र के नियम का सही रूप से पालन करवाया। सभी निरस्त केस की दोबारा सुनवाई करके हमारे भाई-बंधुओं को वन अधिकार पत्र उपलब्ध कराया। आपने हमारी आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए दंतेवाड़ा जिले के समस्त देवगुड़ियों को पर्यटन के रूप में विकसित किया। हमारी आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर को पहली बार राज्य सरकार से प्राथमिकता मिली है। आपके सभी प्रयासों से जल- जंगल-जमीन का अधिकार हम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास जो हुआ, उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

रायगढ़ जिले की लैलूंगा तहसील की ग्राम पंचायत झरान के मुलकूराम पैकरा ने बताया कि सरकार के द्वारा 10 ग्रामवासियों को वन अधिकार पत्रक मिला है। सब खुश हैं, हम वहाँ खेती कर रहे हैं, फलदार वृक्ष लगाए हैं। गांव के उपयोग हेतु चारागाह, तालाब, गौठान, स्कूल, खेल मैदान, श्मशान घाट के लिए सामुदायिक वन अधिकार पत्रक मिल गया है। आपके सरकार से पहली बार हमने गांव के देव सीमा का जहाँ हम लोगों का पुरखा से निस्तार उपयोग करते आ रहे हैं। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार 2 अक्टूबर को मिल गया है। जिसका उपयोग ग्रामवासी करेंगे। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार क्षेत्र के विकास के लिए योजना बनाकर गांव के लोगों का विकास करेंगे, धन्यवाद।

पण्डो जनजाति के बच्चों को पढ़ाने बाइक पर टी.व्ही. लेकर गांव पहुंचे शिक्षक

पारा मोहल्लों में लाउड स्पीकर से हो रही पढ़ाई

कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर विकासखण्ड की शासकीय प्राथमिक शाला, पाठपानी के सहायक शिक्षक अशोक सिंह लोधी ने बताया कि जैसे ही लॉकडाउन लगा, हमारे विद्यालय ही नहीं अन्य राज्य के विद्यालय भी बंद हो गए थे। उस दौरान हमारे मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल जी के द्वारा अनोखी पहल ‘पढ़ई तंुहर दुआर’ के तहत ऑनलाइन क्लासेस प्रारंभ कराई गई। चंूकि हमारे विद्यालय दूर अंचल में होने के कारण वहाँ मोबाइल नेटवर्क नहीं है और वहां के अभिभावकों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है। हमारे विद्यालय में 70 प्रतिशत तक पण्डो जाति के बच्चे दर्ज हैं और गरीब हैं, जिससे बच्चे नहीं जुड़ पा रहे थे और जैसे ही ‘पढ़ई तंुहर दुआर’ प्रारंभ हुआ। हमने सोचा टी.वी. के माध्यम से मनोरंजन करते हुए बच्चे पढ़ेंगे और मुझे लगा कि बस्तामुक्त विद्यालय हो सकेगा। इसके पश्चात् हमने बाइक पर एल.ई.डी. टी.वी., ब्लू टूथ मोबाइल इन्वर्टर सेट बांधा और पूरे विद्यालय को ही लेकर बच्चों तक पहुंचाया और हमने बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना प्रारंभ किया।

 

महासमुन्द जिले के शासकीय प्राथमिक शाला तेलीबांधा के शिक्षक खोरबाहरा सोनवानी ने कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई के लिए अच्छी व्यवस्था करने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि शिक्षक उत्साह के साथ ‘पढ़ाई तुंहर पारा, पढ़ाई तुंहर द्वार’ जैसी योजना संचालित कर रहे हैं। बच्चों को लाउड स्पीकर से पढ़ा रहे हैं। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की लवन तहसील के अनंत पाण्डेय जो इस समय बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एण्ड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर में एम.एस सी. (एग्रीकल्चर) का छात्र हैं, ने सभी युवाओं की ओर से मुख्यमंत्री को बहुत-बहुत बधाई एवं धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि दो साल के भीतर ही महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय का शिलान्यास कर दिया है। आपकी योजनाओं से किसानों और ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। उद्यानिकी और वानिकी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। साग-सब्जी, फल के साथ वन और वनोपज को लेकर दूर की सोच जरूरी है। जगदलपुर के शिक्षक गणेश तिवारी ने लोकवाणी में बताया कि आमचो बस्तर के तहत आमचो रेडियो के माध्यम से कोरोना काल में स्कूली बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने का काम हम लोगों द्वारा किया गया।

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