गुणवक्ताहीन निर्माण सामग्री का किया जा उपयोग। लगा रहे शासन को करोड़ों का चूना ।एक साल में कई जगह दिखने लगे दरार।





 गरियाबंद से थनेश्वर बंजारे की रिपोर्ट

 गरियाबंद/छुरा----- मामला छुरा महादेव घाट के तटबन्ध निर्माण का शासन द्वारा विभिन्न विकास व निर्माण कार्यों के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं ।लेकिन जिम्मेदार अधिकारी व ठेकेदार की मिलीभगत से यह निर्माण कार्य बंदरबांट की वजह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रहा है ।निर्माण कार्यों में लीपापोती व भ्रष्टाचार निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। सवाल यह भी है कि आखिर सरकार ऊंचे ओहदा पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को तनख्वाह और सारी सुविधाएं किस काम के लिए दे रही है।

 एक ऐसा ही मामला गरियाबंद जिले के छुरा जल संसाधन विभाग का है। जहां छुरा जल संसाधन विभाग के अंतर्गत छुरा महादेव घाट,शमशान घाट  तक बाढ़ नियंत्रण तटबंध निर्माण 1860 मीटर में होना है। जिसके लिए  शासन द्वारा 583.32 लाख की राशि स्वीकृत हुआ है ।जिसके लिए दुर्ग निवासी को सरस गोयल को विभाग द्वारा टेंडर दिया गया है जहां निर्माण कार्य में ठेकेदार द्वारा लीपापोती कर सारे नियमों को ताक में रखकर गुणवत्ताहीन निर्माण सामग्री का इस्तेमाल कर शासन को करोड़ों रुपए नुकसान पहुंचा रहे हैं। नदी के तट व मेड में ड्रेसिंग के नाम पर मुरूम के जगह मिट्टी युक्त मुरूम व निर्माण कार्य में खराब मटेरियल का इस्तेमाल किया जा रहा है ।जिससे इतनी बड़ी लागत से बन रहे तटबंध निर्माण के कार्य की मजबूती पर सवाल उठना लाजमी है ।ठेकेदार द्वारा शासन के एक भी प्रतिशत नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। तटबंध  निर्माण कार्य को साल भर भी नहीं हुए और अभी से ही ठेकेदार व विभाग की पोल खुलने लगी है । तटबंध मे जगह जगह दरारे इस बात की गवाही दे रही है कि किस तरह से ठेकेदार द्वारा नियमों की अनदेखी कर मनमानी किया जा रहा है ।तटबंध पूरी तरह से अभी से ही धसने लगा है और टूटने लगा है।


 आपको बता दें कि लगभग 6 करोड़ की लागत से बन रहे तटबंध निर्माण कार्य ब्लाक मुख्यालय से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर है इसके बावजूद भी विभाग के अधिकारियों को उक्त निर्माण कार्य की ओर झांकने तक की फुर्सत नहीं है । ऐसा लगता है जैसे इस मामले की जानकारी विभाग को है जिसके कारण विभाग के संरक्षण में ही गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य व  लीपापोती का खेल चल रहा है।

 जिसके कारण शासन के इतने बड़े महत्वपूर्ण निर्माण कार्य में खुलेआम सारे नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए घटिया निर्माण कार्य कर जल संसाधन विभाग छुरा व ठेकेदार शासन को ठेंगा दिखा रहे हैं ।बड़े निर्माण कार्य व बड़े कमीशन का खेल इन दिनों जल संसाधन विभाग छुरा द्वारा ठेकेदार के साथ मिलकर खूब खेला जा रहा है ।यही वजह है कि ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य में दिलचस्पी नहीं और ना ही विभाग के अधिकारियों को निर्माण कार्य को झांकने में दिलचस्पी नहीं क्योंकि साहब को तो उनका हिस्सा तो मिलना ही है।




ठेकेदार द्वारा रायल्टी की खुलेआम चोरी

  बता दे कि छुरा में चल रहे तटबंध निर्माण कार्य में  ग्राम पंचायत  बोड़रबांधा से मुरूम खुदाई कर लाया जा रहा है लेकिन ठेकेदार द्वारा यहां भी रॉयल्टी चोरी कर शासन को लाखों रुपए राजस्व क्षति पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं ।इस मामले को लेकर हमारे संवाददाता ने पड़ताल किया तो इस मामले का पता चला ।ठेकेदार के नुमाइंदों द्वारा माउंट चैन से मुरूम हाईवा में लोडिंग कर व परिवहन कर  छुरा के तटबंध निर्माण कार्य में ले जाया जा रहा है लेकिन एक भी ट्रिप में  रॉयल्टी नहीं काटा जा रहा है केवल दो चार रॉयल्टी काटकर केवल फॉर्मेलिटी बस ही पूरी की जा रही है ।यह भी बताना लाजमी है कि बिना रायल्टी के मुरूम जो हाईवा से निर्माण कार्य स्थल जा रहा है वह मुरम ही नहीं है मुरूम के नाम पर घटिया क्वालिटी के मिट्टी युक्त मुरूम को निर्माण कार्य में खफा कर ठेकेदार उस मुरूम को स्वयं नंबर वन बताकर स्वयं सर्टिफिकेट देने में लगे हैं तो वही माइनिंग विभाग के अधिकारियों के कार्यों पर सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर विभाग ने इस  मुरूम की स्वीकृति कैसे दी।

वहीं इस मामले को लेकर जलसंसाधन विभाग छुरा के एस डी ओ पंच भावे को जब इस मामले के बारे में संपर्क करने पर अनभिज्ञता जाहिर किए।लेकिन अधिकारी का इस तरह से अनजान बनना एक बड़ी लापरवाही को दर्शाता है क्योंकि उक्त कार्य मुख्यालय से महज 2 किलोमीटर पर चल रहा है।वैसे भी छुरा जलसंसाधन विभाग व एसडीओ शुरू से इस तरीके के मामले में हमेशा सुर्खियों में रहा है।छुरा जलसंसाधन विभाग कई ऐसे मामलों से जल्द ही पर्दा उठेगा और भ्रष्टाचार की पोल खुलेगा।वहीं इस मामले को लेकर खनिज विभाग को भी संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया ।

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