नेतृत्वविहीन कटघोरा डीएफओ...गजराज नियंत्रण में नाकाम...! आक्रमक हो चुके दंतैल लगातार मचा रहे खूनी उत्पात, हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जनधन सुरक्षा के लिए डीएमएफ से तय योजना राशि का अता- पता नही


छत्तीसगढ़ सेवा न्यूज कोरबा से द्वारिका यादव की रिपोर्ट

कोरबा/कटघोरा:- जिले के कटघोरा वनमंडल में पदस्थ वनमंडलाधिकारी शमा फारुखी हाथियों के नियंत्रण व निगरानी को लेकर पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहीं है जहां बीते डेढ़- दो माह से आक्रामक हाथियों का जमकर जारी खूनी उत्पात के रोकथाम को लेकर गंभीरता नजर नही आ रही है।जिससे जनधन की हानि का सिलसिला थम नही रहा है।एक ओर गजराज उत्पात मचाकर घरों को नुकसान व फसलों को चट करने के साथ तबाह भी करते जा रहे है तथा दूसरी ओर इनके हमले से अकारण मौत का आंकड़ा भी दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है।यह पहला मौका है जब कटघोरा वनमंडल में विचरण कर रहे हाथियों का दल आक्रमक नजर आ रहा है।जिनके रहवासी क्षेत्र की ओर दस्तक मात्र से ग्रामीणों में दहशत के साथ अफरा- तफरी का माहौल निर्मित हो जाता है।डीएफएम मद से हाथी प्रभावित क्षेत्रों के गांवों में हाथी सुरक्षा उपकरण, सोलर, एलईडी लाइट के साथ हाथी से बचाव हेतु पक्के मकान में अस्थाई तौर पर रात्रि विश्राम हेतु रेस्क्यू सेंटर निर्माण तय योजना के तहत स्वीकृत लाखों की राशि का भी इस वनमंडल में अता- पता नही।जनता द्वारा शासन को जो टेक्स दिया जाता है उसी टेक्स के पैसे से शासन विकास कार्य कराती है ताकि जनता के पैसे का लाभ जनता को ही मिले।लेकिन जिस अधिकारी को कटघोरा वनमंडल के कार्यों एवं योजनाओं का सही क्रियान्वयन हेतु जिस उद्देश्य को लेकर कुर्सी पर बैठाया गया है, अधिकारी अपने उस दायित्व के पालन को भूलकर जंगल के भीतर होने वाले लाखों- करोड़ों के कार्यों पर अपनी टेढ़ी नजर रख अपने स्वार्थों की पूर्ति को लेकर उन कार्यों का क्रियान्वयन महज कागजों में करते हुए भ्रष्ट्राचार एवं लीपापोती में नजर आने लगी है।कटघोरा वनमंडल में हाथियों के उत्पात से हो रहे जनधन की हानि के रोकथाम को लेकर बीते दिनों गोंगपा नेताओं ने भी डीएफओ को ज्ञापन सौंप अपनी चिंता जाहिर की है।लिहाजा कटघोरा वनमंडल में इन दिनों आक्रमक अंदाज में विचरण कर रहे हाथियों के उत्पात को इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।अब यहाँ अधिकारी बदलकर कार्यों में कसावट लाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है।ताकि भ्रष्टाचार भरे वातावरण से पृथक कार्यों एवं योजनाओं का सुचारू संचालन हो सके।

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