पाली वनपरिक्षेत्र में कराए गए कार्यों पर भ्रष्ट्राचार का टीका लगाने वाले तत्कालीन रेंजर ने दूसरे जगह की मिट्टी- मुरुम से करखापानी नाला का मुहाना बांधकर तैयार करा दिया लाखों का तालाब, नही रुकता चुल्लू भर पानी

 
_________*छत्तीसगढ़ सेवा न्यूज कोरबा से द्वारिका यादव की रिपोर्ट *___


कोरबा/पाली:- वनमंडल कटघोरा के उपवनमण्डल में पदस्थ एसडीओ प्रहलाद यादव ने लगता है पाली रेंजर रहते हुए भ्रष्ट्राचार करने की जैसे कसम खा ली थी तभी तो कराए गए स्टॉफडेम, पहुँचमार्ग व तालाब निर्माण के कार्यों को धरातल पर अधूरा व कागजों में पूरा बताकर उन कार्यों का जनाजा निकाल दिया।उन्होंने एक तालाब का निर्माण ऐसा कराया जिसमें दूसरे जगह के मुरुम- मिट्टी से नाला का मुहाना बांधकर तालाब निर्माण का कार्य पूर्ण करा लिया जहां उसमें चुल्लू भर पानी रुका हुआ भी देखने को नही मिला।

अपने कार्यों से पाली परिक्षेत्र में लगातार सुर्खियों में रहने वाले चर्चित तत्कालीन रेंजर एवं वर्तमान कटघोरा उपवनमण्डल के एसडीओ प्रहलाद यादव के द्वारा जेमरा सर्किल के ग्राम बगदरा के समीप करखापानी नाला मे बीते वर्ष 2020 जून- जुलाई में लाखों की लागत का एक तालाब निर्माण कराया गया।जब ग्राम बगदरा बस्ती से लगभग एक किलोमीटर पहाड़ी एवं जंगल के उबड़- खाबड़ और पथरीली रास्तों से गुजरकर उक्त तालाब निर्माण स्थल पर पहुँचा गया तो प्रहलाद यादव द्वारा तैयार कराए गए तालाब को देखकर सहसा ही एक शायर की गजल याद आ गई जिसमे कहा गया है कि जंगल- जंगल ढूंढ रही है मृग अपनी कस्तूरी को, कितना मुश्किल है तय करना भ्रष्ट्राचार की दूरी को...!अपने भ्रष्ट्र कृत्य को अंजाम तक पहुचाँने तत्कालीन रेंजर श्री यादव द्वारा जंगल मे अन्य स्थान से मिट्टी- मुरुम का खनन कराकर तथा ट्रेक्टर के माध्यम से उसे करखापानी नाला के मुहाने को पाटकर और इस प्रकार लाखों का एक तालाब तैयार करा लिया गया।औपचारिकता पूर्ण तालाब निर्माण के महज एक माह बाद जब पहली बारिश हुई तो पानी का बहाव नाले के मुहाने पर पाटे गए मिट्टी- मुरुम को अपने साथ बहा ले गया अब स्थिति ऐसी है कि जिस उद्देश्य को लेकर करखापानी नाले में तालाब निर्माण की स्वीकृति मिली थी वह तो प्रहलाद यादव के भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ गया जिसमें वर्तमान चुल्लू भर पानी रुका हुआ देखने को नही मिलता।इस प्रकार साहब ने अपने रेंजरी कार्यकाल में जंगल मे मंगल वाली कहावत को चरितार्थ कर दिखाया क्योंकि जंगल के भीतर उनके द्वारा कराए जाने वाले कार्यों को तब ना कोई देखने वाला, न कोई बोलने वाला था।लेकिन अब उनके भ्रष्ट्राचारित कार्यों की शिकायत उपरांत विभागीय जांच में भ्रष्ट्राचार किये जाने की पुष्टि होने के बाद डीएफओ द्वारा उचित कार्यवाही की सिफारिश के साथ सीसीएफ एवं पीसीसीएफ को भेजी गई जांच रिपोर्ट पश्चात भी कार्यवाही नही होना अनेक संदेहों को जन्म देता है जहाँ रेंजर से एसडीओ बने प्रहलाद यादव के हौसले कार्यवाही के अभाव में इन दिनों आसमान की बुलंदियों को छूते नजर आ रहा है।बताया जाता है कि एसडीओ श्री यादव की पहुँच सूबे के मुख्यमंत्री के एक खास सिपहसालार तक है।जिसकी वजह से वे अनेकों भ्रष्ट्र कार्यों को अंजाम देने के बाद भी कटघोरा वनमंडल में सीनातान जमे हुए है।ऐसे में उन पर विभागीय कार्यवाही का अभाव होना विभाग के अन्य भ्रष्ट्राचारियों के हौसले को भी बुलंद करता है।

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