कृषक को बिना सूचना दिए प्रबंधक ने कर दिए पंजीयन निरस्त कृषक को धान बेचने में हो रही परेशानी, परेशान कृषक ने दी आत्महत्या की चेतावनी।

 

 गरियाबन्द/ फिंगेश्वर--- फिंगेश्वर धान ख़रीदी केंद्र के प्रबंधक की लापरवाही के चलते  एक किसान को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान इतना परेशान है कि आत्महत्या की चेतवानी भी दे डाली। मामला फिंगेश्वर धान खरीदी केंद्र की आश्रितग्राम सेन्दर का हैं । किसान लतेल राम देवांगन का निधन हो गया।  पर विभागी अधिकारी, कर्मचारी को भी अवगत होना चाहिए कि जो किसान का निधन हुआ । उनका मृत्यु प्रमाण पत्र  प्रस्तुत मंगवा कर पंजीयन निरस्त कर या पंजीयन को सुधरवा सकें। पर अधिकारी,कर्मचारी ने बिना कोई सूचना जानकारी दिए पंजीयन निरस्त कर दी। जहाँ तक शासकीय कामो मे माने तो जब तक मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत न हों तो कोई कार्यवाही नहीं कर सकते। पर उनके पुत्र  हरि राम देवांगन पिता लतेल देवांगन ग्राम सेन्दर को कोई सूचना जानकरी दी, ना ही मृत्यु प्रमाण पत्र मंगाया गया। उसके बावजूद किसी की निजी जानकारी के आधार पर पंजीयन निरस्त कर दिया गया। यह गैर जिम्मेदाराना हरकत से  उनके पुत्र हरि राम को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आप को बता दे कि किसान  लतेल देवागन  का वर्ष 2019--2020 में ऋण पुस्तिका से 2.60 हे. में लगभग 85 क्विंटल धान विक्रय किया गया था  जब लतेल देवांगन की मौत हुई तो  उनके जगह उनके पुत्र  हरि राम देवागन  2020-2021 में धान बेचने आये तो संस्था के प्रबन्धक मनोज साहू के द्वारा बताया गया कि मैंने आपके पिता जी का नाम पंजीयन काट दिया गया है।वही हरि राम धान बेचने के लिए तहसील, अनुविभाग  के चक्कर लगा रहे है। उसके बाद भी अभी तक किसान का कोई निराकरण नही हो पा रहा है।उक्त किसान के ऊपर  तीन परिवार आश्रित है जिसके भरण पोषण नही कर पा रहे है तथा कर्ज अदा करने में असमर्थ है।  वही परेशान किसान ने हिदायत दी है कि मेरे समस्या, परेशानी का कोई निदान नही हुआ तो  आत्महत्या  की हिदायत दी ।
 
वही प्रबंधक का कहना है कि कम्प्यूटर से डाटा डिलीट हो जाने पर यह समस्या हो रही है।पर सवाल ये खड़ा होता है कि किसी कि निजि जानकारी के आधार पर पंजीयन निरस्त कर दिया गया। कोई नियम कायदा कानून हैं कि नही कि किसान को बिना सूचना दिए पंजीयन काट दे ।

 वही तहसीलदार साहब से बात करने पर ये जानकारी मिली कि किसान के पास से आवश्यक दस्तावेज मंगाए गए है। जिससे किसान को धान बेचने में कोई परेशानी ना हो।
 
तहसीलदार  साहब ने तो दस्तावेज मंगा दिए पर देखना ये है कि धान खरीदी में कुछ ही दिन बचे है। आखिर अंतिम तिथि तक़ किसान धान बेंच पाते है  कि नही।अगर धान ना बिके, कर्ज न अदा हुवा तो किसान ने आत्महत्या की हिदायत दी।
इस तरह की ये मामला पहली नही दर्रीपार किसान के साथ भी ये हुवा है ।
 अब देखना होगा कि विभागी अधिकारी इस लापरवाही के चलते कहा तक कार्यवाही करते है । किसान की परेशानी दूर हो पाता है। कि यू  दर दर भटकते रहेगे किसान ।

इस लापरवाही के चलते जितने भी जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी हो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही हो।

 भविष्य में किसानों को धान बेचने में कोई परेशानी ना हो इसका शासन प्रशासन विशेष ध्यान दे

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