आई एस बी एम युनिवर्सिटी का पहला दीक्षांत समारोह गरिमामय रूप से संपन्न



 छुरा गरियाबंद

छत्तीसगढ़ सेवा न्यूज़

रिपोर्ट -रामकुमार यादव

संपर्क सूत्र-9009867006

छुरा-18 जनवरी, वनांचल एवं जनजाति बाहुल्य जिला गरियाबंद जिले में स्थापित आई एस बी एम विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह का गरिमामय आयोजन 18 जनवरी को विवि कैम्पस नवापारा में हुआ। विवि के प्रशासनिक भवन से दीक्षांत शोभायात्रा प्रारंभ होकर दीक्षांत स्थल तक पहुचीं। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता माननीया राज्यपाल छत्तीसगढ़ राज्य एवं विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्ष माननीया सुश्री अनुसुईया उइके के द्वारा वर्चुअल रूप से किया गया। मुख्य वक्ता की आसंदी पर पद्मश्री प्रो. ए. टी. दाबके पूर्व कुलपति आयुष विवि रायपुर, प्रत्यक्ष एवं अति विशिष्ट अतिथि श्री उमेश पटेल केबिनेट मंत्री उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, विशेष अतिथि के रुप में डॉ. शिव वरण शुक्ल (डी. लिट) अध्यक्ष, छग निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, रायपुर वर्चुअल माध्यम से मंचस्थ रहे।

            विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार राकेश तिवारी ने बताया कि दीक्षांत समारोह का प्रारंभ राष्ट्रगान एवं मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की अगली कड़ी में मंचस्थ अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ से किया  गया । विवि के कुलसचिव डॉ. बीपी भोल के द्वारा महामहिम की अनुमति से कार्यक्रम प्रारंभ हाने के पश्चात स्वर्ण पदक के योग्य विद्याथियों के नामों की घोषणा की गई। मंचस्थ प्रो. ए. टी. दाबके, विवि के कुलाधिपति डॉ. विनय एम अग्रवाल , प्रति कुलपति डॉ. आनंद महलवार द्वारा विद्यार्थीयों को स्वर्ण पदक एवं उपाधि वितरण संपन्न हुआ।  

      विवि के प्रति कुलपति डॉ. आनंद महलवार ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि, केवल उपाधि प्राप्त करने से सफलता नहीं मिलती। स्कूल, कॉलेज के अनेक इम्तिहान उत्तीर्ण करने के बाद आप सभी को जीवन की वस्तविकताओं का सामना करना हैं । और इस भावी परीक्षा के लिए अभी तक जो भी ज्ञान अर्जित किया है, उसका उपयोग करना है। उन्होंने कहा कि संघर्ष एवं कठिनाईयों से ही सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। जीवन में कभी भी, किसी भी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। अनेक लोग सफलता मिलने के बाद लापरवाह हो जाते हैं। कुछ लोग जिंदगी की राह में चलने के पहले ही हार मान लेते हैं। उन्होंने युवाओं का जोश के साथ आह्वान किया कि युवावस्था हमेशा नहीं रहती, इसलिए इसका समुचित उपयोग करना चाहिए। साथ ही आज जो स्वर्ण पदक एवं उपाधि प्राप्त किये अध्येताओं को मैं शुभकामनाएं ज्ञापित करता हूँ।

         आईएसबीएम विवि के कुलाधिपति डॉ. विनय अग्रवाल ने अपने दीक्षांत संबोधन में कहा कि, वनांचल में स्थापित युनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत का हिस्सा बनना हम सब के लिये लिए गौरव की बात है। वनांचल क्षेत्र में इस आयोजन का होना इस बात का प्रमाण है कि मेधावी विद्यार्थियों के द्वारा कितने मेहनत और लगन से शिक्षा प्राप्त की है एवं अपनी शिक्षा के प्रति वे जागरूक और सजग हैं । छूरा के इस वनांचल में विवि का निर्माण जनजाति बाहुल्य इलाके के बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं रोजगार के संसाधन उपलब्ध करने के उद्देश्य से किया है।  प्रकृति के गोद में स्थित आईएसबीएम विवि के पहले दीक्षांत समारोह की सभी को शुभकामनाएं ज्ञापित करता हूँ। 

         विशेष अतिथि डॉ. शिव वरण शुक्ल ने दीक्षांत को वर्चचुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा, दीक्षांत एक किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए पावन पर्व है। जो प्रतिज्ञा आज विवि के विद्यार्थीयों ने ली है, उसको वास्तविक पटल पर प्रदर्शित करना अनिवार्य है। गुरूकुल शिक्षा के महत्व को बताते हुये उन्होने कुलाधिपति डॉ विनय अग्रवाल को बधाईयाँ दी की तथा शिक्षा के उन्नयन एवं यहां के युवावर्ग को समाज में नव कीर्तिमान स्थापित करने प्रेरित किया। 

           दीक्षांत समारोह के मुख्यवक्ता मंचस्थ पूर्व कुलपति आयुष विवि पद्मश्री प्रो.ए टी दाबके ने भविष्य की उज्ज्वल कामनाओं के साथ, विद्यार्थीयों को जीवन में नित सीखते रहने की प्रेरणा दी। अपने अनुभवों को विस्तार से बताते हुये उन्होने अध्येताओं को ग्रामीण क्षेत्रोें के स्वास्थ्य कार्यक्रमों का हिस्सा बनने, जल संरक्षण हेतु प्रेरित किया। वहीं  वनांचल में स्थापित विवि की सराहना करते हुए, प्रथम दीक्षांत समारोह हेतु विवि के कुलाधिपति एवं समस्त एकेडेमिक को  बधाईयाँ देते हुये अध्येताओं से कहा कि कैम्पस से निकलकर वास्तविक धरातल तक जाकर काम करने का वक्त आ गया है आप सभी समाज हित में कार्य करें एवं अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें मैं आप सभी को उज्जवल भविष्य हेतु शुभकामनाएं प्रेषित करता हूँ। 

         वर्चुअल माध्यम से दीक्षांत समारोह में उपस्थित राज्यपाल एवं विवि की कुलाध्यक्ष अनुसुईया उइके जी ने कहा कि सर्वांगीण शिक्षा हमारे गौरवशाली मूल्यों को स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए ज्ञान और सूचना टेक्नोलॉजी में समन्वय करके हम अपने शैक्षिक विकास को तीव्र कर सकते हैं। इसके साथ-साथ हमारे शिक्षण संस्थानों को, मुल्यपरक शिक्षा पर भी जोर देना चाहिए जिससे विद्यार्थियों को आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक विरासत के प्रति पूर्ण जानकारी हो। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थाएं, हमारे युवाओं को भारतवर्ष की गौरवशाली संस्कृति एवं परंपरा के ज्ञान से भी समृद्ध करें। विद्यार्थीयों को शैक्षणिक के साथ व्यावहारिक ज्ञान अति आवश्यक है। सकारात्मक दृष्टिकोण, राज्य, समाज और राष्ट्र हित हो, तो सफलता अवश्य मिलती है। गरियाबंद जैसे वनांचल में आईएसबीएम की स्थापना पूरे जनजाति जिले के लिए सौभाग्य के समान है। 

          गरिमामय कार्यक्रम में विवि के कुलसचिव डॉ. बीपी भोल के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन  एवं आभार व्यक्त करते हुए महामहिम की अनुमति से दीक्षांत समारोह के समापन की घोषणा की। दीक्षांत समारोह का सफल संचालन कला एवं मानविकी विभाग के सहा. डायमंड प्राध्यापक साहू ने किया। 

बॉक्स 01-  मेधावियों ने इसे जीवन भर न भूलने वाला पल बताया

वहीं दीक्षान्त समारोह में मेडल और डिग्री हासिल करने वाले छात्र-छात्रायें बेहद उत्साहित हैं। डिग्री लेकर जहां कोई वैज्ञानिक बनना चाहता है तो कई शिक्षक बनकर देश के निर्माण में सहयोग करने का जज्बा रखते है। दीक्षान्त समारोह में महामहिम राज्यपाल के संदेश को पाकर छात्र- छात्राये उत्साहित रहें। मेधावियों अध्येताअें ने इसे जीवन भर न भूलने वाला पल करार दिया। विवि का यह पहला दीक्षान्त समारोह कई मायनों में यादगार बन गया। इस दीक्षान्त समारोह का जहां वनांचल में पहली बार शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय आयोजन रहा। वहीं 3 वर्षों के अंतराल के बाद पहला दीक्षांत विश्वविद्यालय के लिए यहां से उत्तीर्ण विद्यार्थीयों के लिए अलग अनुभव है।

बॉक्स 02-  विवि के वर्चुअल पटल पर पूरे समारोह का हुआ लाइव प्रसारण

पहले दीक्षांत समारोह का प्रसारण विवि के वर्चुअल पटल एवं सभी सोशल मिडिया प्लेटफार्मों भी किया गया। जिसमें विवि के विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति रही। कोरोना के इस दौर में दीक्षांत में केवल सीमित संख्या में कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए विद्यार्थीयों को विवि परिसर में आमंत्रित किया गया था। शेष सभी विद्यार्थी इस अवसर के साक्षी लाइव प्रसारण के माध्यम से बने।

विविध संकायों के मेधावी विद्यार्थियों को मिलेगा स्वर्ण पदक-  

कला एवं मानविकी संकाय से अनिल पटेल एम.फिल हिन्दी सत्र 2018-20, लोकेश कुमार साहू स्नातकोत्तर अंग्रेजी सत्र 2018-20, पीला बाई स्नातक सत्र 2017-20, लेखमनी सिन्हा स्नातक पत्रोपाधि सत्र 2019-20, निधि पाण्डे स्नातकोत्तर पत्रोपाधि सत्र 2019-20, विज्ञान संकाय से - लक्ष्मीकान्त स्नातकोत्तर प्राणीशास्त्र सत्र2017-19,प्रभा देवांगन स्नातकोत्तर प्राणीशास्त्र सत्र 2018-20, जागृति स्नातकोत्तर वनस्पतिशास्त्र सत्र 2018-20, ललिता स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र सत्र 2018-20, रेखा स्नातकोत्तर भौतिकशास्त्र सत्र 2018-20, प्रतिमा स्नातक गणित सत्र 2017-20, प्रियंका स्नातक जैव प्रौद्योगिकी सत्र 2017-20, सुसंना कुजूर स्नातक फैशन डिजाइन सत्र 2017-20, मिर्जा राशिद स्नातक इंटीरियर डिजाइन सत्र 2017-20, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय से- लक्ष्मी प्रजापति स्नातकोत्तर प्रबंधन सत्र 2017-19, संजय टंडन स्नातकोत्तर प्रबंधन सत्र 2017-20, वरूण साहू स्नातकोत्तर वाणिज्य सत्र 2018-20, आशुतोष कौशिक स्नातकोत्तर ई-प्रबंधन सत्र 2017-18, कम्प्यूटर एवं आई.टी संकाय से - सूर्यकान्त स्नातकोत्तर पत्रोपाधि सत्र 2019-20, गजेन्द्र कुमार ध्रुव स्नातक कम्प्यूटर विज्ञान सत्र 2017-20, हेमन्त कुमार स्नातक पत्रोपाधि सत्र 2019-20, विधि संकाय से - अर्चना धुरंधर स्नातकोत्तर विधि सत्र 2018-20 को उपाधि एवं स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।

राकेश तिवारी

(डिप्टी रजिस्ट्रार)

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