महासमुंद कलेक्टर की अध्यक्षता में ज़िला साक्षरता मिशन प्राधिकरण कार्यकारिणी समिति की बैठक


साक्षरता इंसान के जीवन को आकार देने के साथ ही उनकी सांस्कृतिक पहचान भी बनाता हैः कलेक्टर श्री सिंह

साक्षरता के लिए हम सभी मिलकर काम करें

   महासमुंद शिक्षा विभाग की योजनाओं की समीक्षा को लेकर आज यहाँ कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में कलेक्टर डोमन सिंह की अध्यक्षता में ज़िला साक्षरता मिशन प्राधिकरण कार्यकारिणी  समिति की बैठक हुई। कलेक्टर ने पढ़ना-लिखना अभियान के अंतर्गत प्रौढ़ शिक्षार्थियों के लिए मोहल्ला साक्षरता क्लास का संचालन करने व मोहल्ला साक्षरता क्लास का शुभारंभ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और पंचायतीराज प्रतिनिधियों कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता अनुसार स्त्रोत व्यक्ति, कुशल प्रशिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों का उन्मुखीकरण एवं नए स्वयंसेवी शिक्षकों का प्रशिक्षण करा लिए जाएं। मोहल्ला साक्षरता क्लास का चिन्हांकन एवं कक्षावार प्रभारियों की नियुक्ति एवं प्रशिक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया जाए। महासमुंद जिले में 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुष साक्षरता दर 82.05 प्रतिशत और महिला साक्षरता दर 60.25 प्रतिशत है। कुल औसत साक्षरता दर 71.02 प्रतिशत है।

 
      ज़िला परियोजना अधिकारी रेखराज शर्मा ने बताया की ज़िले में 10 हज़ार असाक्षरों को साक्षर करने के लिए 998 स्वयं सेवी शिक्षकों को ऑनलाईन और ऑफ़ लाईन प्रशिक्षण दिया गया है। पढ़ना लिखना अभियान एप में 10 हज़ार असाक्षरों का बुनियादी प्रवेशिका पुस्तक सहित फ़ोटो अपलोड की कार्रवाई की जा रही है। बैठक में अध्यक्ष जनपद पंचायत सरायपाली कुमारी भास्कर, अध्यक्ष जनपद पंचायत महासमुन्द ने असाक्षरों को साक्षर करने के बारे में अपने विचार और सुझाव दिए।

 
    कलेक्टर सिंह ने जिले की कम साक्षरता दर को लेकर इस बात पर जोर दिया कि असाक्षर को साक्षर करने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि साक्षरता की दर कम होना हमें कई मायनों में पीछे ले जाता है। इसलिए जरूरी है कि विशेष कार्ययोजना बनाकर इस पर काम किया जाए। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि 15 वर्ष से अधिक आयु के ड्राप आउट पात्र महिला एवं पुरूषों को शिक्षा  से जोड़ने पर बल दिया।      

 

   कलेक्टर डोमन सिंह ने कहा कि साक्षरता इंसान के जीवन को आकार देने के साथ ही उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी बनाता है। गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को दूर करने साक्षरता महत्वपूर्ण है। इसके साथ ज़्यादा साक्षरता से परिवार, समाज, राज्य और देश की प्रतिष्ठा बढ़ती है। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन सुव्यवस्थित एवं योजना बनाकर करें। आगामी 8 सितम्बर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस व साक्षरता सप्ताह कार्यक्रम कर विकासखण्डों, ग्राम पंचायतों एवं मोहल्ला स्कूलों में विविध गतिविधियां संचालित की जाए। इसके साथ जिले में संपूर्ण साक्षरता के संबंध में गांव स्तर तक प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को जोड़कर सतत अभियान चलाकर साक्षरता दर को बढ़ाने की कार्य योजना बनाई जाए। उन्होंने कहा इस दौरान कोविड-19 गाइड लाईन का पालन भी किया जाए।

 
    कलेक्टर सिंह ने कहा कि पढ़ना-लिखना अभियान ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रों में संचालित की जा रही है। साक्षरता के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, पोषण साक्षरता के साथ ही वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, व शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी असाक्षरों को पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ दी जाए । योजना का मुख्य उद्देश्य 10 फीसदी जेंडर गैप कम करने का लक्ष्य है। उद्देश्य की पूर्ति के लिए कार्यक्रम में महिला साक्षरता पर विशेष ध्यान दिया जाए। इस अवसर पर जनपद पंचायत महासमुन्द के अध्यक्ष यतेन्द्र साहू, जनपद पंचायत सरायपाली के अध्यक्ष कुमारी भास्कर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश छिकारा, आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त पूजा बंसल, जिला शिक्षा अधिकारी रॉबर्ट मिंज, पंचायत विभाग के उप संचालक दीप्ति साहू, जिला परियोजना अधिकारी रेखराज शर्मा, एन.एस.एस. के जिला समन्वयक डांॅ मालती तिवारी, एन.सी.सी. प्रभारी प्रदीप कन्हेर, डाईट प्राचार्य अरूण प्रधान, सुनीता तांडी पी.सी.पुरोहित अमित तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

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