विशेष लेख : रोजगार की गारंटी के साथ आजीविका का सशक्त माध्यम बना मनरेगा : जिले में प्रतिवर्ष 1 लाख हितग्राहियों को रोजगार

 

विभिन्न योजनाओं के साथ अभिसरण से और मजबूत हुई मनरेगा

गरियाबंद. लोगों के मांग के अनुरूप रोजगार की गारंटी देने वाला महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना वास्तव में आज आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन और रोजगार की गारंटी बन गया है. मनरेगा योजना से कोरोना संकट और लॉकडाउन के दौरान भी मजदूरों को काम मिलना राज्य शासन की कोई भूखा रहे और हर हाथ को काम मिले, ध्येय की पुष्टि करता है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशानुरूप गरियाबंद जिले में इस दौरान स्थायी रोजगारमूलक कार्य स्वीकृत किये गये. जिसमें एक करोड़ 75 लाख मानव दिवस का सृजन किया गया तथा 19 हजार 118 हितग्राहियों के लिए स्थायी परिसंपत्ति का निर्माण किया गया. जिससे मजदूर और उनके परिवारों को इस भयावह संकट के दौर में भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ा.

जिला गरियाबंद में कलेक्टर निलेशकुमार क्षीरसागर के मार्गदर्शन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनांतर्गत दिसम्बर 2018 के पश्चात हितग्राही, सामुदायिक मूलक कार्यों एवें आजीविकामूलक कार्यो के साथ ही शासन के महत्वपूर्ण कार्यक्रम नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी अंतर्गत कुल 336 ग्राम पंचायतों मे से 250 ग्राम पंचायतों में 310 गौठान निर्माण कार्य किया जा रहा है तथा सभी गौठानो में चारागाह विकसित करने हेतु कार्य किया जा रहा है. जिले के कुल 957 नालों में से 312 नालों का चिन्हांकन कर नरवा उपचार का कार्य किया जा रहा है.

 बाड़ी विकास अंतर्गत 2044 बाड़ी निर्माण कार्य किया गया है तथा घुरूवा विकास कार्यक्रम अंतर्गत 3058 कार्ये जैसे भू-नाडेप, वर्मी टांका का निर्माण किया जा रहा है. शासन की महत्वपूर्ण गोधन न्याय योजनांतर्गत कुल 123 सक्रिय गौठानों में गोबर खरीदी का कार्य किया जा रहा है. योजना प्रारंभ से आज तक कुल 1 लाख 25 हजार 217 क्विंटल गोबर खरीदी किया गया है. जिसकी लागत राशि 250.43 लाख रूपये है. खरीदे गये गोबर से 15 हजार 707 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया गया. जिसमें 8971.78 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट 89.71 लाख रूपये का विक्रय किया गया है। इसी तरह 9 हजार 372 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट का उत्पादन किया गया, जिसमें 3029.60 क्विंटल कम्पोस्ट, राशि 19.25 लाख रूपये का विक्रय किया गया है.

 लाभांश की राशि लगभग 29.33 लाख रूपये स्व-सहायतो समूहों के खाते में हस्तांतरित किया गया है. गौठानो को मल्टीएक्टीविटी सेंटर के रूप तैयार किये जाने हेतु कुल 25 गौठानों को चिन्हांकन कर आजिविका गतिविधियां संचालन हेतु स्व सहायता समूह के महिलाओं के द्वारा बकरी पालन, मुर्गी पालन, सीमेंट पोल, चौनलिंक फेसिंग, बाड़ी विकास, मसरूम उत्पादन, जैविक दवाई निर्माण, बांस बर्तन, धूपबत्ती, गुलाल, गोबर लकड़ी, गोबर के कण्डे बनाने का कार्य किया जा रहा है, जिससे स्व-सहायता समूह को 7.54 लाख रूपये का आय प्राप्त हुआ है. आजिविका संवर्धन हेतु महिलाओं से गौठान से जोड़ा गया है. जिसके तहत् गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सीमेंट पोल, चौनलिंक फेंसिंग, मशरूम उत्पादन, जैविक दवाई निर्माण, बांस बर्तन, धूपबत्ती, गुलाल, गोबर लकड़ी, गोबर के कण्डा इत्यादि का कार्य किया जा रहा है, जिससे आर्थिक स्थिति से सृदढ़ हो रहे है.

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