महिला स्व-सहायता समूहों की सामग्रियों को मिलेगा एक प्लेटफार्म ‘‘हमर विरासत’’ सिरपुर के ब्रांड़ नाम से किया जाएगा विक्रय जिले के महिला स्व-सहायता समूह अब और होंगी सशक्त


महासमुन्द 31 दिसम्बर 2019/ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक विकास के लिए कार्य किया जा रहा है, जिसके तहत जिले के सभी विकासखंडों में महिला स्व-सहायता समूह द्वारा विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। जिला प्रशासन के विशेष पहल पर कलेक्टर श्री सुनील कुमार जैन तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. रवि मित्तल के विशेष प्रयास पर जिले के महिला स्व-सहायता समूह के उत्पादित सामग्रियों को सिरपुर के ब्रांड नाम से विक्रय किया जाएगा। इसके लिए जिला मुख्यालय, सभी ब्लॉक मुख्यालयों में सामग्रियों के बिक्रय के लिए स्टॉल शुरू किया जाएगा। यहा पर महिला स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित सामग्रियों को बिक्री की जाएगी। इससे महिलाओं के इस प्रयास से उनके आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में आने वाले समय पर बेहतर परिणाम देखने को मिलेगा। इससे महिलाएं अपने हुनर और योजना का लाभ उठाकर न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
बागबाहरा विकासखण्ड के कोमाखान की एकता महिला ग्राम संगठन महिला स्व-सहायता समूह के सदस्यों ने बताया कि गांव के 12 समूह मिलकर हैण्डवॉश, फिनाईल, वाशिंग पाउडर, आचार, बड़ी-पापड़ का निर्माण करती है। उन्हें अब सिरपुर ब्रांड के नाम से सामग्रियों की बिक्री करने का मौका मिलेगा। समूह की महिलाओें को देना आरसीटी के माध्यम से सामग्री निर्माण करने के लिए उन्हें दस दिवसीय प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया गया था। उन्होंने बताया कि अजीविका मिशन के तहत 15 हजार रूपए की चक्रीय निधी की राशि प्रदाय किया गया था। जिससे समूह की महिलाएं व्यवसाय प्रारंभ की थी। इसके उपरांत सामुदायिक निवेश कोष के तहत 60 हजार रूपए उन्हें प्रदान किया गया था, जिससे उनके आर्थिक स्थिति काफी सुधार हुई है।
इसी तरह बसना विकासखंड के भैंसाखुरी के संस्कार ग्राम संगठन की महिलओं ने बताया कि उनके संगठन में पांच महिला समूह है, जो वांशिग पाउडर, साबुन, फिनाईल, उजाला, लिक्विट, अगरबत्ती, मोमबत्ती, शैम्पू, हारपिक का निर्माण करती है। महासमुन्द विकासखंड के पटेवा के जागृति महिला स्व-सहायता समूह में 10 सदस्य है। उनेक द्वारा मिष्ठान बनाया जाता है एवं ग्राहकों से शुभ कार्यों में आर्डर लेकर भी बनाया जाता है। कछारडीह के जय श्रीकृष्णा महिला स्व-सहायता समूह के सदस्यों ने बताया कि उनके समूह में 12 सदस्य है उनके द्वारा विभिन्न अजीविका गतिविधियों के साथ गौठान से जैविक खाद निर्माण, गोबर से धूपबत्ती, कीटनाशक की दवाईयां, गोबर से उत्पादित झूमर, कण्ड़ा, गोबर का गमला, दिया इत्यादि सामग्रियां बनाई जाती है।
 रामसागर (सिनोधा) के सखी निदान स्व-सहायता समूह में 10 सदस्य है। जिनके द्वारा अलग हटकर 5, 7, एवं 9 वॉल्ट के विद्युत बल्ब का निर्माण किया जाता है। इसके आलावा श्री गणेश महिला स्व-सहायता समूह बिरकोनी के महिलाओं ने बताया कि उनके समूह में 10 सदस्य है, उनके सभी प्रकार की मिठाईयां बनाई जाती है। महिला स्व-सहायता समूह सदस्यों को योजनाओं के तहत बैंको से ऋण भी उपलब्ध कराया गया। इन सभी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने जिला प्रशासन की तारीफ करते हुए कहती है कि हमारे जैसे तमाम महिला स्व-सहायता समूह के महिलाओं के लिए यह एक मिसाल है जो हमारी उत्पाद को ध्यान में रखकर एक अलग पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है। यह सभी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का अच्छा माध्यम है।
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