किसान आंदोलन को लेकर केन्द्र सरकार गंभीर नहीं :- तेजराम विद्रोही


राजिम विधानसभा से संवाददाता नेहरू साहू कि रिपोर्ट


कॉरपोरेट परस्त व किसान, कृषि आम उपभोक्ता विरोधी कानून को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून लागू करने की मांग को लेकर दिल्ली के सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन का समर्थन करने टिकरी बार्डर के धरना सभा  में छत्तीसगढ़ के किसान, छात्र और संस्कृति कर्मियों ने एकजुटता कायम की है। छत्तीसगढ़ से किसानों का जत्था दिल्ली के विभिन्न सीमाओं में जारी धरना सभा मे अपनी उपस्थिति देकर आंदोलन के साथ एकजुटता कायम कर रहे हैं।

आज तुहीन देव के नेतृत्व में क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच औरअखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन के सदस्यों प्रमोद कुमार, मदन भारती, उर्मिला, निरंजन, टिकेश कुमार, सात्विक, अक्षय, शिशु रंजन ने क्रांतिकारी गीत " ऐ भगत सिंह तू जिन्दा है, हर एक लहू के कतरे में " प्रस्तुत किये।
टिकरी बार्डर के धरना सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव तथा छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संचालक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही ने कहा कि आज जो किसान सड़क पर बैठकर कड़कड़ाती ठंड में आंदोलन करने जो मजबूर है उसके लिए मुख्य रूप से केन्द्र की मोदी सरकार जिम्मेदार है। जिन्होंने कथित कृषि सुधार का अध्यादेश लाया था जिसका देश के किसान संगठनों ने विरोध किया और उन्होंने इस विरोध को महज विपक्षी पार्टियों का विरोध कहकर हल्के में लिया जो कि आज यह केवल किसानों का ही नहीं बल्कि आम उपभोक्ताओं का भी आंदोलन बन चुकी है। मोदी सरकार इस आंदोलन को न्यायालय के हस्तक्षेप से कमजोर कर दबाना चाहते हैं। वहीं बातचीत कर हल निकालने का बहाना बनाकर किसानों की मांगों को नजरंदाज करने में लगी हुई है जैसा कि उनके नेताओं द्वारा जारी किसान विरोधी बयानों से दिखाई देता है। सरकार को इस बात से भी समझ जाना चाहिए कि न्यायालय द्वारा तय किये गए कमेटी में से एक सदस्य खुद ब खुद बाहर निकल गया है जिससे कमेटी की अस्तित्व ही समाप्त हो जाती है। अब तो सरकार को बिना देर किये किसानों की मांगों को पूरा करना चाहिए जबकि तारीखें बढ़ाकर स्वयं ही अपनी संवेदनहिंता का परिचय दे रहे हैं।

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