छतीसगढ़ सेवा न्यूज़
मैनपुर, अमलीपदर
मकरध्वज प्रधान
8817826305
मैनपुर- मैनपुर मुख्यालय से लगभग75 किलोमीटर दूर उड़ीसा सिमा से लगा ग्राम पंचायत बिरिघाट के आश्रित ग्राम पानीगांव तेल नदी में स्थित अद्भुत शक्ति मई विशालकाय पत्थरो से निर्मित प्राचीन काल से रहस्यो से भरी धार्मिक, शिव मंदिर लगभग आज से 40 वर्षों से बना हुआ था जो तेल नदी के तेज बहाव से लेकर आया पेड़ से टकराकर टूट गई दस वर्ष हो गया वैसा ही पड़ा है,गॉव के बुजुर्गों के द्वारा बताया जाता है कि यहां कि जो शिवलिंग है वो प्राकृतिक रूप पूर्वकाल से बनी हुई है,द्वापरयुग में जब माता कुन्ती सहित पांच पांडवों का अज्ञातवास था उस समय यहाँ आकर छत्ता पथरा मे समय व्यतित किए है, वो अवशेष आज भी यहाँ नजर आती हैं जैसे भीम पैर का चिन्ह,व निवासरत पत्थरों से बनी हुई गुफाओं,यहाँ सैलानियों का आकर्षक का मुख्य बिंदु प्राकृतिक शिवलिंग, अद्भुत रहस्यमई गुफाएं, खांदा पत्थर, चढ़ाऊँ पत्थरों की सीढ़ी,साथ ही तेल नदी के तेज बहाव से यहाँ बनने वाली फुब्बारे,श्रावण मास,महाशिवरात्रि में रात्रिकालीन जगराता यहां सम्पन्न कराई जाती है ना शृद्धालुओं के लिए ठहरने हेतु न कोई उत्तम व्यवस्था है न पीने लायक शुध्द जल मिलता है।स्थानीय जन प्रतिनिधियों की मौन साफ तौर पर दिखाई देती है 2021 नव वर्ष के लिए बीते कल हजारो की तादात में सैलानियों पिकनिक हेतु व यहाँ की सौंदर्य निखारने आए हुए थे।
मैनपुर, अमलीपदर
मकरध्वज प्रधान
8817826305
मैनपुर- मैनपुर मुख्यालय से लगभग75 किलोमीटर दूर उड़ीसा सिमा से लगा ग्राम पंचायत बिरिघाट के आश्रित ग्राम पानीगांव तेल नदी में स्थित अद्भुत शक्ति मई विशालकाय पत्थरो से निर्मित प्राचीन काल से रहस्यो से भरी धार्मिक, शिव मंदिर लगभग आज से 40 वर्षों से बना हुआ था जो तेल नदी के तेज बहाव से लेकर आया पेड़ से टकराकर टूट गई दस वर्ष हो गया वैसा ही पड़ा है,गॉव के बुजुर्गों के द्वारा बताया जाता है कि यहां कि जो शिवलिंग है वो प्राकृतिक रूप पूर्वकाल से बनी हुई है,द्वापरयुग में जब माता कुन्ती सहित पांच पांडवों का अज्ञातवास था उस समय यहाँ आकर छत्ता पथरा मे समय व्यतित किए है, वो अवशेष आज भी यहाँ नजर आती हैं जैसे भीम पैर का चिन्ह,व निवासरत पत्थरों से बनी हुई गुफाओं,यहाँ सैलानियों का आकर्षक का मुख्य बिंदु प्राकृतिक शिवलिंग, अद्भुत रहस्यमई गुफाएं, खांदा पत्थर, चढ़ाऊँ पत्थरों की सीढ़ी,साथ ही तेल नदी के तेज बहाव से यहाँ बनने वाली फुब्बारे,श्रावण मास,महाशिवरात्रि में रात्रिकालीन जगराता यहां सम्पन्न कराई जाती है ना शृद्धालुओं के लिए ठहरने हेतु न कोई उत्तम व्यवस्था है न पीने लायक शुध्द जल मिलता है।स्थानीय जन प्रतिनिधियों की मौन साफ तौर पर दिखाई देती है 2021 नव वर्ष के लिए बीते कल हजारो की तादात में सैलानियों पिकनिक हेतु व यहाँ की सौंदर्य निखारने आए हुए थे।

