दबंगों ने वृद्ध गरीब दंपत्ति का छीना जमीन- मकान और मारपीट कर परिवार सहित गांव से निकाला बाहर, थाना, कलेक्टर व निदान शिविर में गुहार लगाने के बाद भी न्याय से वंचित, दूसरे के घर पर आश्रय लेकर रोजी- मजदूरी बनी मजबूरी


*छत्तीसगढ़ सेवा न्यूज पाली से चैतराम केवट की रिपोर्ट *                   

कोरबा/चैतमा:- गांव के कुछ लोगों ने मेरे व मेरे परिवार के साथ मारपीट कर, जमीन व मकान पर भी कब्जा करते हुए मुझे परिवार सहित गांव से बाहर निकाल दिया, इस अत्याचार के खिलाफ न्याय पाने तकरीबन दो साल से मैं बेबस गरीब अपने परिवार के साथ अधिकारियों की चौखटों पर घूम रहा हूँ पर मुझे न्याय नही मिल पाया है..!यह कहना है 65 वर्षीय वृद्ध किसान विश्वनाथ सिंह गोंड़ का जिसके 40 वर्षों से काबिज जमीन व मकान पर दबंगों द्वारा कब्जा कर और इस परिवार के साथ मारपीट करते हुए गांव से बाहर निकाल दिया गया।पीड़ित परिवार अपना जमीन- मकान वापस पाने थाना व कलेक्टर एवं आयोजित निदान शिविर में भी गुहार लगा चुका है लेकिन अबतक न्याय नही मिल पाया है।यह गरीब परिवार अब एक परिचित के घर पर आश्रय लेकर दूसरों के घरों में काम कर पेट पालने को विवश व लाचार है।

पाली विकासखण्ड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत डोंड़की के आश्रित ग्राम भेलवाटिकरा में वृद्ध किसान विश्वनाथ सिंह गोंड़ 65 वर्ष वनभूमि पर विगत लगभग 40 वर्षों से काबिज रहते हुए मकान बनाकर अपनी पत्नी सीताबाई तथा 35 वर्षीय परित्यक्तता पुत्री व एक नाती, नातिन के साथ निवासरत था।विश्वनाथ और उसका परिवार काबिज जमीन पर खेती- बाड़ी के सहारे पेट पालते आ रहा था।उक्त किसान को गत वर्ष 2010 में उसके कब्जे की वनभूमि कंपार्टमेंट 149/1 का वन अधिकार पत्र के रूप में शासन की ओर से 101 हेक्टेयर का पट्टा भी मिला था।लेकिन गत वर्ष 2018 में गांव के ही परमेश्वर सिंह, बजरंग, गेवटा, बीरसिंह, व सगुना निवासी राकेश सिंह की नजर गरीब के जमीन पर टिक गई और उन दबंगों द्वारा मिलकर अपनी दबंगई दिखाते हुए किसान व उसके परिवार के साथ मारपीट करते हुए गांव से बाहर निकाल दिया तथा पीड़ित के मकान एवं खेती- बाड़ी पर कब्जा कर लिया गया।पीड़ित परिवार ने इस घटना की शिकायत विगत 29 मई 2018 को कटघोरा थाने में जाकर की जहां पुलिस ने धारा 155 की कार्रवाई कर न्यायालय जाने की सलाह दे दी।जिसके बाद उक्त गरीब परिवार 01 फरवरी 2020 को लिखितमय आवेदन देकर कलेक्टर से अपनी गुहार लगाई परंतु यहाँ से भी निराशा हाथ लगी।थकहार कर यह परिवार ग्राम चैतमा में एक परिचित के घर पर शरण लेकर रह रहा है और रोजी- मजदूरी करते हुए जीवन यापन करने को मजबूर है जहां वृद्ध दंपति दूसरों के घरों पर झाडू- पोंछा तो उनकी परित्यक्तता पुत्री बर्तन साफ करके अपना व बच्चों का पेट पाल रहे है।यह परिवार बीते 13 फरवरी 2021 को चैतमा में आयोजित निदान 36 शिविर में उपस्थित अधिकारियों को भी आवेदन देकर अपनी गुहार लगाई है लेकिन न्याय की आस लगाए बैठे इस परिवार को उम्मीद की कोई किरण नजर नही आ रही है।ऐसे में प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह परिवार टूट चुका है।

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